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क्या आप बिहार में बसने वाली इस काशी नगरी के बारे में जानते हैं?

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क्या आप बिहार में बसने वाली इस काशी नगरी के बारे में जानते हैं?

सारांश

बिहार का भागलपुर जिला, जिसमें बटेश्वर धाम है, महादेव के निवास का पहला स्थान था। क्या आप जानते हैं कि काशी बनने से पहले महादेव का निवास यहीं होना था? जानें इस अद्भुत स्थान के बारे में।

मुख्य बातें

भागलपुर का बटेश्वर धाम महादेव की पहली पसंद था।
यह स्थान गंगा के किनारे स्थित है और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है।
बटेश्वर धाम में मां काली का मंदिर भी है।
यहाँ ऋषि वशिष्ठ ने भी तप किया था।
इसे गुप्त काशी के नाम से भी जाना जाता है।

नई दिल्ली, 10 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बाबा विश्वनाथ की नगरी के नाम से मशहूर वाराणसी पूरी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव की पहली पसंद काशी नहीं थी? पहले बिहार में एक जगह को महादेव के निवास के लिए चुना गया था।

यह स्थान है बिहार का भागलपुर जिला, जिसे सिल्क सिटी यानी रेशम नगरी के नाम से जाना जाता है। भागलपुर में एक छोटा सा शहर है कहलगांव। यहाँ मां गंगा की तेज धारा के बीच एक पहाड़ी पर बाबा बटेश्वर नाथ का मंदिर है, जिसे बटेश्वर धाम कहा जाता है।

कहा जाता है कि काशी बसने से पहले देवर्षि नारद, देव शिल्पी विश्वकर्मा और वास्तुकार वास्तु पुरुष ने यही स्थान महादेव के निवास के लिए चुना था। लेकिन जब इस जमीन की नापी की गई, तो पता चला कि यह जगह कैलाश की भूमि से एक जौ कम है। बस थोड़ी सी जमीन की कमी की वजह से यह जगह काशी नहीं बन पाई। अगर उस समय जौ भर जमीन और मिल जाती, तो यह स्थान कैलाश के बराबर त्रिखंड बन जाता और महादेव आज भी यहीं विराजमान होते।

यह स्थान महादेव की शर्तों के अनुसार था। सबसे पहले, यहाँ गंगा उत्तरवाहिनी बहती है। दूसरी, यह ऋषि कोहल की तपोस्थली थी, जहाँ उन्होंने कठिन तपस्या की थी, इसलिए यह जगह पवित्र और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण थी। लेकिन, तीसरी शर्त कि भूमि कैलाश के बराबर होनी चाहिए, वह पूरी नहीं हुई। यही वजह थी कि महादेव का निवास स्थान बिहार में नहीं बन सका।

बटेश्वर धाम का महत्व यहीं खत्म नहीं होता। कहा जाता है कि यहीं ऋषि वशिष्ठ ने भी घोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें रघुकुल का कुल गुरु बनने का वरदान दिया। इसी कुल में भगवान राम का जन्म हुआ और यहीं ऋषि वशिष्ठ ने महादेव की पूजा और साधना की थी।

इस धाम की खास बात यह है कि बाबा बटेश्वर के शिवलिंग के सामने माता पार्वती का मंदिर नहीं बल्कि मां काली का मंदिर है, जो दक्षिण की ओर विराजमान हैं। इसलिए उन्हें दक्षिणेश्वरी काली कहा जाता है। यही कारण है कि यह जगह एक शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध है। इसे तंत्र विद्या के लिए भी उपयुक्त माना गया है। इसे गुप्त काशी भी कहा जाता है।

इतना ही नहीं, यहाँ गंगा और कोसी का संगम भी है। यह स्थान ऋषि दुर्वासा की तपोस्थली भी रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपनी अद्वितीयता के कारण महत्वपूर्ण हैं। भागलपुर का बटेश्वर धाम भी ऐसा ही एक स्थान है, जो धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बटेश्वर धाम की विशेषताएँ क्या हैं?
बटेश्वर धाम में मां गंगा की धारा, महादेव का मंदिर और मां काली का मंदिर है। इसे तंत्र विद्या के लिए उपयुक्त माना गया है।
क्या यह स्थान शक्ति पीठ है?
हाँ, बटेश्वर धाम को शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है और यहाँ देवी काली की पूजा की जाती है।
बिहार में अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कौन से हैं?
बिहार में गया, नालंदा, और पटना जैसे कई प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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