क्या अमेरिका था हसीना सरकार के गिरने का मास्टरमाइंड? लीक रिकॉर्डिंग ने मचाया हंगामा
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका की लीक रिकॉर्डिंग ने बांग्लादेश में विवाद को जन्म दिया है।
- शेख हसीना को ५ अगस्त, २०२४ को देश छोड़ना पड़ा।
- अवामी लीग ने अमेरिका पर आरोप लगाए हैं।
- राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में २०२४ की राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना सरकार के गिरने से जुड़ी डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग अमेरिका से लीक होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस रिकॉर्डिंग के लीक होने के बाद अवामी लीग ने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
बांग्लादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने हाल ही में एक इवेंट में कहा कि यह ऑडियो अवामी लीग की लंबे समय से चली आ रही बात को सही साबित करता है कि शेख हसीना सरकार का गिरना पूरी तरह से एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया नहीं थी।
बीते कुछ वर्षों में बांग्लादेश और नेपाल में सरकार गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। फ्रांस में भी ऐसी कोशिशें हुईं, लेकिन वो नाकाम रहीं। इन सभी देशों में सरकार के परिवर्तन में एक नाम हमेशा से सामने आता रहा है - अमेरिका। जिन देशों में सरकारें गिरीं, वहां पहले भारी हिंसा या क्रांति देखी गई। यह आरोप लगाया जा रहा है कि इस सब के पीछे अमेरिका का हाथ था। हालांकि, इसका कोई आधिकारिक सबूत नहीं है।
अब बांग्लादेश से संबंधित लीक हुई अमेरिकी डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग ने वॉशिंगटन को नए आरोपों के केंद्र में ला दिया है। एक प्रमुख डेली, स्ट्रैटन्यूज ग्लोबल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस रिकॉर्डिंग में एक सीनियर अमेरिकी डिप्लोमैट की बातचीत शामिल है, जिसमें वे बांग्लादेश की इस्लामी राजनीतिक ताकतों से जुड़ने और हसीना के बाद के दौर में देश की दिशा के बारे में चर्चा कर रहे हैं।
इससे बांग्लादेश में अमेरिका की भूमिका को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है और अवामी लीग के नेताओं को यूनुस सरकार पर तीखे हमले करने का अवसर मिला है।
शेख हसीना को ५ अगस्त, २०२४ को अपने देश से भागने पर मजबूर होना पड़ा था। बांग्लादेश छोड़ने के बाद से वह दिल्ली में रह रही हैं। चौधरी ने आगे कहा कि अमेरिकी डिप्लोमैट की लीक हुई ऑडियो बातचीत बांग्लादेश में चुनाव के बाद की सरकारों को मैनेज करने की खुली साजिश को उजागर करती है और इसके गंभीर नतीजों के बारे में चेतावनी देती है।
अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि अवामी लीग जैसी प्रमुख राजनीतिक ताकतों को बाहर करने से मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा, जिससे बिना लोकप्रिय जनादेश के एक अवैध सरकार का गठन होगा।