क्या केंद्र सरकार ने मनरेगा में बदलाव कर श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात किया है?: राव नरेंद्र सिंह

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क्या केंद्र सरकार ने मनरेगा में बदलाव कर श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात किया है?: राव नरेंद्र सिंह

सारांश

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने मनरेगा में बदलाव को श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात करार दिया है। क्या यह सच है कि केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण योजना को कमजोर किया है? जानिए इस विवाद पर ताज़ा अपडेट!

मुख्य बातें

मनरेगा में बदलाव से श्रमिकों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
राव नरेंद्र सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने श्रमिकों के अधिकारों के साथ समझौता किया है।
अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है।

चंडीगढ़, ५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने मनरेगा कानून में परिवर्तन को श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात बताया। उन्होंने सोमवार को कहा कि आज मनरेगा पर चर्चा के लिए हमने कांग्रेस के सभी विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई।

राव नरेंद्र सिंह ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि हम इस चर्चा के माध्यम से लोगों को बताएंगे कि कैसे इस कानून में बदलाव करके आम श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात किया गया है। हम इस बारे में आम लोगों को जागरूक करेंगे।

हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने श्रमिकों के हितों की रक्षा करने वाले कानून को समाप्त कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए इस नए कानून में कई खामियां हैं। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि ६० फीसदी केंद्र सरकार और ४० फीसदी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि आज अधिकांश राज्यों की आर्थिक स्थिति खराब है। ऐसे में मेरा सवाल है कि राज्य सरकार कैसे आर्थिक सहयोग देगी? जवाब स्पष्ट है, नहीं दे पाएगी। इससे यह साफ जाहिर होता है कि इस सरकार ने मनरेगा के कानून को समाप्त कर दिया है। ऐसा करके ये लोग मजदूरों के हितों के साथ समझौता कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी योजना है कि लोगों के बीच जाकर उन्हें बताएं कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से बनाई गई योजना को खत्म कर दिया है, ताकि लोग जागरूक हो सकें।

उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार ने किसानों के लिए तीन कृषि कानून लाए थे, तो इसके विरोध में किसानों ने व्यापक आक्रोश दिखाया था। किसानों ने सड़कों पर उतरकर इस कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था। जिसका परिणाम यह हुआ कि केंद्र सरकार को यह कानून वापस लेना पड़ा। हम चाहते हैं कि अब इसी तरह से मनरेगा के संबंध में भी आम लोगों को जागरूक किया जाए।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हमने १० जनवरी से लेकर २५ फरवरी तक ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ का आरंभ किया है। इस कार्यक्रम को हम ग्राम सभा तक लेकर जाएंगे।

१० जनवरी को इस संबंध में जिला स्तर पर प्रेसवार्ता की जाएगी। ११ जनवरी को एक दिन का उपवास और प्रतीकात्मक विरोध किया जाएगा। १२ से २९ जनवरी तक पंचायत स्तर तक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत सभी जगह चौपाल में बैठक की जाएगी। इसके बाद हमारे नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की तरफ से ग्राम प्रधानों को पत्र वितरित किए जाएंगे।

हमारी तरफ से प्रधान स्तर पर नुक्कड़ सभाओं का भी आयोजन किया जाएगा। ३० जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना भी किया जाएगा। ३१ जनवरी से लेकर ६ फरवरी तक हम जिलास्तरीय मनरेगा बचाओ अभियान का आरंभ करेंगे। ७ से लेकर १५ फरवरी तक राज्यस्तरीय विधानसभा भवन का घेराव किया जाएगा। इसके बाद १६ से लेकर १७ फरवरी तक हम आंचलिक स्तर पर मनरेगा बचाओ कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्णय लिया है, ताकि हम लोगों को इस विषय में जागरूक कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मनरेगा में बदलाव से श्रमिकों पर असर पड़ेगा?
हाँ, मनरेगा में बदलाव से श्रमिकों के अधिकारों और उनके आर्थिक हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने मनरेगा में क्यों बदलाव किया?
केंद्र सरकार का कहना है कि बदलाव से योजना के कार्यान्वयन में सुधार होगा, लेकिन विपक्ष इसे श्रमिकों के अधिकारों का हनन मानता है।
मनरेगा बचाओ अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है कि कैसे मनरेगा के कानून में बदलाव से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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