नवरात्रि का जादू: झारखंड का देवरी मंदिर, जहां आदिवासियों को है पूजा का विशेष अधिकार

Click to start listening
नवरात्रि का जादू: झारखंड का देवरी मंदिर, जहां आदिवासियों को है पूजा का विशेष अधिकार

सारांश

चैत्र नवरात्रि के विशेष अवसर पर झारखंड के देवरी मंदिर की सोलहभुजी मां भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं। अद्वितीय पूजा परंपरा और समृद्ध विरासत की कहानी जानें।

Key Takeaways

  • देवरी मंदिर में मां की सोलहभुजी प्रतिमा है।
  • यह मंदिर 700 से अधिक वर्षों पुराना है।
  • आदिवासी समुदाय को पूजा का विशेष अधिकार है।
  • नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त आते हैं।
  • मंदिर की भव्यता और वास्तुकला अद्वितीय है।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 19 मार्च से पूरे देश में चैत्र नवरात्रि का आरंभ होने जा रहा है, और इसके साथ ही देवी मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं।

हमारे पुराणों में 51 शक्तिपीठ मंदिरों का उल्लेख किया गया है, जबकि सिद्धपीठ मंदिरों की संख्या लाखों में है। एक ऐसा अद्वितीय मंदिर झारखंड में स्थित है, जहां नवरात्रि के नौवें दिन बलि की प्रथा आज भी जीवित है। हम यहां देवरी मंदिर (देउड़ी मंदिर) की बात कर रहे हैं।

झारखंड की राजधानी रांची से दक्षिण-पश्चिम दिशा में एनएच-33 पर 60 किलोमीटर दूर तामार में मां जगदम्बा का देवरी मंदिर स्थित है। यहां स्थापित मां की प्रतिमा अन्य सिद्धपीठों से भिन्न है। देवरी मंदिर में मां की सोलहभुजी प्रतिमा है। सामान्यतः मां दुर्गा के आठ हाथ होते हैं, लेकिन यहां मां के 16 भुजाओं में अस्त्र और शस्त्र हैं, जो भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होती हैं। यह प्राचीन मंदिर अब जीर्णोद्धार के दौर से गुजर रहा है। यह माना जाता है कि यह मंदिर दो एकड़ में फैला हुआ है और भगवान शिव की प्रतिमा के ऊपर स्थापित है।

मंदिर का निर्माण विशाल पत्थरों से किया गया है और इसमें सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है। इसके भव्य वास्तुकला का दृश्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है, क्योंकि इसकी बलुआ पत्थर की दीवारों पर देवी-देवताओं की जटिल नक्काशी की गई है। यह मंदिर 700 से अधिक वर्षों पुराना माना जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन्होंने भी मंदिर की संरचना में बदलाव करने का प्रयास किया, उन्हें देवताओं के प्रकोप का सामना करना पड़ा है। इस कारण से मंदिर की संरचना झारखंड की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करती है।

मंदिर की एक और खास बात इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है। जबकि शक्तिपीठ और सिद्धपीठ में पूजा का अधिकार आमतौर पर पुजारी को होता है, देवरी मंदिर में पुजारी को सप्ताह में एक दिन पूजा का अधिकार दिया गया है, जबकि अन्य छह दिन आदिवासी समुदाय के लोग मां की विशेष आराधना करते हैं। मार्च का महीना मंदिर और भक्तों के लिए विशेष होता है क्योंकि होली और चैत्र नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

चैत्र नवरात्रि के दौरान, लाखों भक्त मां के विभिन्न रूपों के दर्शन के लिए आते हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी इस मंदिर में कई बार दर्शन कर चुके हैं, जिनकी उपस्थिति ने इस मंदिर की लोकप्रियता में इजाफा किया है।

Point of View

जहां आदिवासी समुदाय का विशेष अधिकार है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का प्रतीक है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

देवरी मंदिर कहां स्थित है?
देवरी मंदिर झारखंड के तामार में, रांची से 60 किलोमीटर दूर स्थित है।
क्या देवरी मंदिर में बलि की प्रथा है?
जी हां, नवरात्रि के नौवें दिन यहां बलि की विशेष प्रथा जारी है।
क्या देवरी मंदिर के पुजारी को पूजा का अधिकार है?
देवरी मंदिर में पुजारी को हफ्ते में एक दिन पूजा का अधिकार है, जबकि अन्य दिन आदिवासी समुदाय के लोग पूजा करते हैं।
देवरी मंदिर की देवी की प्रतिमा किस प्रकार की है?
देवरी मंदिर में मां की सोलहभुजी प्रतिमा है, जो भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती है।
इस मंदिर का निर्माण किस प्रकार से किया गया है?
यह मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों से बनाया गया है और इसमें सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है।
Nation Press