क्या लगातार खांसी जान का खतरा बन सकती है? इन आयुर्वेदिक उपायों से मिलेगी राहत
सारांश
Key Takeaways
- खांसी के प्रकार: सूखी और बलगम वाली खांसी।
- आयुर्वेदिक उपाय: मुलेठी, लौंग, अदरक।
- गुनगुने पानी का गरारा और भाप लेना फायदेमंद।
- संतुलित आहार और पर्याप्त पानी का सेवन करें।
- अगर लक्षण गंभीर हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में खांसी की समस्या सामान्य होती है, लेकिन यदि यह लगातार बनी रहे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। छाती में बेचैनी, बलगम का बनना, या गले में जलन जैसे लक्षण सांस की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इन लक्षणों का पता लगाकर घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने से खांसी को नियंत्रित किया जा सकता है और सांस की सेहत को बेहतर रखा जा सकता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, खांसी मुख्यतः दो प्रकार की होती है - सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजली और जलन होती है, जबकि बलगम वाली खांसी में छाती भारी लगने, बलगम निकलने और सीने में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। यदि खांसी कई दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें, लेकिन प्रारंभिक चरण में आयुर्वेदिक उपाय काफी प्रभावी हो सकते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ खांसी से राहत के लिए कई सरल और प्रभावी नुस्खों का सुझाव देते हैं। सूखी खांसी के लिए मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा चूसना गले को तात्कालिक आराम देता है। वासा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से कफ कम करने में मदद मिलती है। रात को सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीने से खांसी और गले की जलन में काफी राहत मिलती है।
बलगम वाली खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ा, अदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेना बहुत लाभकारी है। यह कफ को पतला करके बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, गर्म पानी में नमक डालकर गरारा करने और भाप लेने से गले और छाती की जलन कम होती है। लौंग, अदरक और इलायची का पाउडर बनाकर या काढ़े के रूप में उपयोग करने से भी खांसी में राहत मिलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं, लेकिन संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और आराम के साथ इनका सेवन अधिक प्रभावी होता है। इन उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से न केवल खांसी नियंत्रित होती है, बल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनी रहती है। हालांकि, यदि लक्षण गंभीर हों जैसे सांस फूलना, बुखार या लगातार कमजोरी, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।