क्या पिकनिक परिवार के साथ होती है और परिवार महाराष्ट्र में अपना काम कर रहा है: अमृता फडणवीस?
सारांश
Key Takeaways
- पिकनिक का असली मतलब परिवार के साथ बिताया गया समय है।
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की व्यस्तता को समझना आवश्यक है।
- ई-बाइकों का उपयोग करने से पर्यावरण की सुरक्षा होगी।
- महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है।
- नेटवर्किंग से आर्थिक विकास के नए अवसर मिलते हैं।
मुंबई, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के पिकनिक से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिकनिक वह नहीं होती जिसमें सुबह से शाम तक काम किया जाता है। असली पिकनिक वह होती है जो परिवार के साथ बिताई जाती है, और हमारा परिवार अपने कार्यों में महाराष्ट्र में व्यस्त है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस समय स्विट्जरलैंड के दावोस में हैं, जहां वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में भाग ले रहे हैं। संजय राउत ने व्यंग्य करते हुए कहा कि देश भर के मुख्यमंत्री दावोस में पिकनिक मना रहे हैं।
संजय राउत के बयान पर अमृता फडणवीस ने कहा कि मुझे सब कुछ नहीं पता, लेकिन मैंने उनके शेड्यूल को देखा है। सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक उनकी लगातार कॉन्फ्रेंस और मीटिंग चलती रहती हैं। किसके साथ बैठक हो रही है, इसकी पूरी जानकारी दस्तावेज में है। जिस तरह से निवेश आ रहा है और एमओयू साइन हो रहे हैं, जो रोजगार के वादे किए जा रहे हैं—यह सब सराहनीय है। भारत जैसे देश के लिए यह आवश्यक है कि हर राज्य का मुख्यमंत्री दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस—दावोस में भाग ले और वहां के लोगों से संपर्क करे। नेटवर्किंग से अनेक दरवाजे खुलते हैं, इसलिए वहां जाना महत्वपूर्ण है।
एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए अमृता फडणवीस ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि आज मुंबई के जीपीओ में डाक विभाग के लिए आयोजित इस शानदार कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला। पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 100 ई-बाइकों का अनावरण किया गया है। इससे कर्मचारियों को बहुत लाभ होगा। अब ये ई-बाइक कर्मचारी स्वयं चलाएंगे। इस तरह की पहलों का आरंभ होना मुझे अत्यंत प्रसन्नता दे रहा है।
डाक विभाग में महिलाओं की भागीदारी और ई-बाइक के लाभों पर उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं आपको मुंबई के जीपीओ के बारे में बताती हूं। यहां कार्यबल में सचमुच 50 प्रतिशत महिलाएं हैं और उनकी संख्या पुरुषों के बराबर है। इस नौकरी में महिलाओं की इतनी अच्छी भागीदारी देखकर बहुत आनंद आता है। पहले कर्मचारी साइकिल या टू-व्हीलर से जाते थे, जिसमें पेट्रोल का खर्चा भी होता था। अब ई-बाइक आने से पर्यावरण के अनुकूल हो गया है, खर्चा भी काफी कम हो गया है और कर्मचारियों का समय भी बहुत बच रहा है।