क्या राष्ट्रपति पुतिन को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता मिला है?
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रपति पुतिन को 'बोर्ड ऑफ पीस' का न्योता मिला है।
- यह बोर्ड गाजा संघर्ष को सुलझाने का प्रयास करेगा।
- इसकी अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।
- रूस अभी इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र के कार्यों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
मास्को, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। क्रेमलिन का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता भेजा है। मास्को इस प्रस्ताव पर गहराई से विचार कर रहा है और वॉशिंगटन के साथ बातचीत की आस लगाए हुए है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को बताया। रूसी न्यूज एजेंसी 'तास' के अनुसार, उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से इस बोर्ड में शामिल होने का ऑफर मिला है। हम इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा, "हम सभी विषयों पर स्पष्टता के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क करने की उम्मीद करते हैं।"
कहा जा रहा है कि यह परिषद शांति योजना के दूसरे चरण के दौरान काम करना शुरू कर देगी। पहला चरण संपन्न हो चुका है, जिसके लिए अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच मिस्र, कतर, अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी।
यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को पश्चिमी देशों ने कूटनीतिक रूप से काफी हद तक अलग-थलग कर दिया है।
बोर्ड ऑफ पीस, गाजा के लिए एक 'अम्ब्रेला ओवरसाइट बॉडी' के तौर पर काम करेगा, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे और इसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे।
मध्य पूर्व और अन्य देशों के नेताओं को इस बोर्ड के लिए न्योता भेजा गया है, जिसमें भारत भी शामिल है।
रॉयटर्स ने एक खत और ड्राफ्ट चार्टर की कॉपी के हवाले से कहा है कि बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवनभर करेंगे। यह गाजा संघर्ष को सुलझाने से शुरू होगा और फिर अन्य संघर्षों से निपटने के लिए इसका विस्तार किया जाएगा।
खत में कहा गया है कि सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा और स्थायी सदस्यता के लिए 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा।
राजनयिकों की चेतावनी है कि यह योजना संयुक्त राष्ट्र के कार्यों को नुकसान पहुंचा सकती है।