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क्या उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना शिवसेना के लिए मायने रखता है?

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क्या उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना शिवसेना के लिए मायने रखता है?

सारांश

क्या उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना शिवसेना के लिए महत्वपूर्ण है? नरेश म्हस्के ने स्पष्ट किया है कि दोनों भाई हैं, लेकिन इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने राज ठाकरे के योगदान और उद्धव की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। क्या यह सब बीएमसी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है?

मुख्य बातें

नरेश म्हस्के का मानना है कि ठाकरे भाइयों के एक होने से शिवसेना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राज ठाकरे का शिवसेना में योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
उद्धव ठाकरे की चुनावी रणनीतियों पर सवाल उठाए गए हैं।

मुंबई, १ जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने सोमवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने की अटकलों को खारिज करते हुए दोनों नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों भाई हैं, और उनके एक होने या न होने से शिवसेना को कोई फर्क नहीं पड़ता।

नरेश म्हस्के ने उद्धव ठाकरे से सवाल किया कि राज ठाकरे, जिन्होंने शिवसेना को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई, उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए क्यों मजबूर किया गया।

उन्होंने कहा, "राज ठाकरे ने शिवसेना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह भारतीय विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष थे और उस समय कांग्रेस का जबरदस्त वर्चस्व था। फिर भी, उन्होंने शिवसेना को खड़ा किया। उद्धव ठाकरे को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज को पार्टी छोड़ने के लिए क्यों मजबूर किया गया।"

नरेश म्हस्के ने उद्धव ठाकरे की हालिया टिप्पणियों पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने 'मराठी अस्मिता' और 'मुंबई खतरे में' जैसे मुद्दे उठाए थे। उन्होंने इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा, "हर बार जब बीएमसी चुनाव नजदीक आते हैं, कुछ लोग 'मराठी खतरे में है' या 'मुंबई खतरे में है' जैसे भावनात्मक नारे उछालते हैं। यह इनका पुराना एजेंडा है।"

उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे अब वही बातें दोहरा रहे हैं, जो पहले यूबीटी के एजेंट बोला करते थे। हमने उनके साथ काम किया है, इसलिए जानते हैं कि यह सब चुनावी रणनीति का हिस्सा है। मौजूदा प्रदेश सरकार असफल नहीं है, यह केवल भ्रम फैलाने की कोशिश है। सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही है और जनता इन भावनात्मक मुद्दों के जाल में नहीं फंसेगी। यह सब बीएमसी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है, लेकिन जनता अब इन बातों को समझती है।

इससे पहले, शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा था कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने की संभावना पर कहा कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व का रास्ता छोड़ दिया है, जबकि राज ठाकरे स्वयं को कट्टर हिंदूवादी बताते हैं। इस वजह से दोनों नेताओं का एक साथ आना विचारधाराओं के टकराव के कारण मुश्किल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि उद्धव और राज ठाकरे के बीच का संबंध केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। शिवसेना की एकता और विचारधारा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ आना संभव है?
हालांकि विचारधारात्मक अंतर है, लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।
नरेश म्हस्के ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों के एक होने या न होने से शिवसेना को कोई फर्क नहीं पड़ता।
राष्ट्र प्रेस
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