क्या टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन नई दिल्ली में उचित था?
सारांश
Key Takeaways
- नई दिल्ली में प्रदर्शन के लिए नियमों का पालन अनिवार्य है।
- बंगाल में भाजपा को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- टीएमसी सांसदों का प्रदर्शन राजनीतिक कारणों से था।
- राज्यपाल को मिली धमकी पर चिंता व्यक्त की गई।
- बंगाल में राष्ट्रविरोधी तत्वों का हौसला बढ़ा है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा प्रतिवाद किया है। भाजपा नेता अनिर्बान गांगुली ने कहा कि नई दिल्ली और कोलकाता में एक बड़ा अंतर है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियम-कानून हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है।
अनिर्बान गांगुली ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि नई दिल्ली, कोई कोलकाता नहीं है। यहाँ प्रदर्शन करने के लिए निर्धारित स्थान होते हैं और प्रशासन को पूर्व में सूचना देना अनिवार्य होता है। बिना अनुमति के प्रदर्शन करने से आम जनता को परेशानी होती है। इसलिए प्रदर्शनकारियों को हटाना एक सही निर्णय था।
गांगुली ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में स्थिति बिल्कुल विपरीत है, जहाँ भाजपा को शांतिपूर्ण प्रदर्शन या सार्वजनिक सभा के लिए भी अदालत का सहारा लेना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि भाजपा को वहाँ 120 बार अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा, फिर भी कई बार अनुमति नहीं मिली। उनके अनुसार, बंगाल में लोकतांत्रिक कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। पुलिस निष्पक्षता से कार्य नहीं करती और राजनीतिक दलों को विरोध करने की स्वतंत्रता नहीं दी जाती।
ईडी की कार्रवाई पर ममता बनर्जी के बयानों पर भी अनिर्बान गांगुली ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में शायद वही एक मुख्यमंत्री हैं, जिनका नाम बार-बार विवादों और ऐसे बयानों से जुड़ता है।
ईडी अदालत के निर्देश पर जांच कर रही है और कानून के तहत एक निजी संगठन पर कार्रवाई कर रही है। इस स्थिति में यह बड़ा सवाल उठता है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री जांच प्रक्रिया में दखल क्यों देना चाहती हैं और एक निजी संस्था को बचाने के लिए इतनी बेचैन क्यों नजर आ रही हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को मिली जान से मारने की धमकी पर भी भाजपा नेता ने गंभीर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि बंगाल में टीएमसी सरकार के संरक्षण में राष्ट्रविरोधी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाले तत्वों का हौसला बढ़ा है। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि एक पूरी प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए, रोहिंग्या और आतंकी स्लीपर सेल बंगाल में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इसी माहौल में राज्यपाल को धमकी दी गई है।