क्या लंदन में 'महाराष्ट्र भवन' की स्थापना होगी? सरकार ने मंजूर किए 5 करोड़ रुपए!

सारांश
Key Takeaways
- महाराष्ट्र भवन का उद्देश्य मराठी संस्कृति को संरक्षित करना है।
- 5 करोड़ रुपए की राशि की मंजूरी दी गई है।
- यह भवन भारत और यूके के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
- यह मराठी समाज के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा।
- गणेशोत्सव के अवसर पर यह निर्णय लिया गया।
मुंबई, २६ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। लंदन में उपस्थित मराठी समुदाय के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। वर्षों से चली आ रही मांग को अंततः महाराष्ट्र सरकार ने पूरा किया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने यह ऐलान किया है कि लंदन के महाराष्ट्र मंडल को 'महाराष्ट्र भवन' की स्थापना के लिए ५ करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इस राशि का उपयोग 'चर्च ऑफ इंग्लैंड' की एक इमारत खरीदने में किया जाएगा, जिसे महाराष्ट्र भवन में परिवर्तित किया जाएगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय गणेशोत्सव के शुभ अवसर पर लिया गया, जिसे लंदन के महाराष्ट्र मंडल के सदस्यों ने एक अनमोल उपहार बताया है और इसके लिए उन्होंने उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।
महाराष्ट्र मंडल, लंदन, यूनाइटेड किंगडम में मराठी संस्कृति को जीवित रखने वाली सबसे पुरानी संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना १९३२ में महात्मा गांधी के निजी सचिव डॉ. एनसी केलकर ने की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य लंदन और उसके आस-पास के क्षेत्र में बसे मराठी लोगों को सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से एकजुट करना है।
पिछले ९३ वर्षों से मंडल किराए की इमारतों में कार्यक्रम आयोजित कर रहा था, लेकिन अब उन्हें अपनी स्थायी इमारत मिलने जा रही है।
हाल ही में मंडल के प्रतिनिधियों ने पुणे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार से मुलाकात कर आर्थिक मदद की अपील की थी। पवार ने तत्क्षण सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया था।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्वीकृति से राज्य सरकार ने ५ करोड़ रुपए की सहायता राशि को मंजूरी दी।
यह भवन केवल मराठी समुदाय का सांस्कृतिक केंद्र नहीं बनेगा, बल्कि यह भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहाँ मराठी साहित्य, नृत्य, संगीत, भाषा कक्षाएं, कार्यशालाएं, और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र भवन के माध्यम से मराठी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी और मराठी भाषा को वैश्विक पहचान भी। यह भवन मराठी समाज के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा।