आरसीपी सिंह का बयान: क्या मुख्यमंत्री बनेगा निशांत कुमार?

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आरसीपी सिंह का बयान: क्या मुख्यमंत्री बनेगा निशांत कुमार?

सारांश

बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ रहा है। आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीतिक क्षमता की तारीफ की है, लेकिन मुख्यमंत्री बनने का निर्णय नीतीश और एनडीए को लेना होगा। जानें और क्या कहा आरसीपी सिंह ने।

Key Takeaways

  • निशांत कुमार में राजनीतिक क्षमता है।
  • मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय नीतीश कुमार और एनडीए को करना होगा।
  • राजनीति में गुटबाजी को संभालना एक नेता की जिम्मेदारी होती है।
  • भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका था, लेकिन निर्णय नीतीश के पक्ष में गया।
  • राजनीति में अनुभव महत्वपूर्ण होता है।

पटना, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की राजनीति में एक बार फिर नई चर्चा का आगाज़ हुआ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत के बारे में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा कि निशांत में राजनीतिक क्षमता है और उनका भविष्य स्पष्ट रूप से उज्ज्वल दिखाई देता है। हालांकि, उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय नीतीश कुमार और एनडीए के नेताओं को मिलकर लेना होगा

आरसीपी सिंह ने कहा कि निशांत का राजनीति में आना एक सकारात्मक कदम है और उन्होंने इसे समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि उनका और निशांत का संबंध कई वर्षों पुराना है और जब उन्होंने पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया, तब उन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया था।

आरसीपी सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि अगर कुछ लोग निशांत को उपमुख्यमंत्री के लायक मानते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नीतीश कुमार और एनडीए के वरिष्ठ नेताओं को ही लेना होगा

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आने के बाद एक नेता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सभी गुटों को एक साथ लाना होता है। जब कोई नेता किसी दल का नेतृत्व करता है, तो उसे विभिन्न विचारधाराओं वाले लोगों को एकत्र करना होता है। यही एक नेता की असली परीक्षा होती है।

आरसीपी सिंह ने निशांत के पार्टी में शामिल होने के कार्यक्रम के बारे में भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि 8 मार्च को जब निशांत ने पार्टी जॉइन की, तब अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वंय मंच पर उपस्थित होते, तो यह एक अलग संदेश देता।

उन्होंने कहा कि यदि उस समय नीतीश कुमार मंच पर होते और निशांत उनसे आशीर्वाद लेते, तो समर्थकों के बीच सकारात्मकता का एक अलग संदेश जाता। उन्होंने यह भी कहा कि मंच पर पैर छूना गलत नहीं है, लेकिन राजनीतिक मंच पर इसका एक विशेष प्रतीकात्मक महत्व होता है।

आरसीपी सिंह ने यह भी कहा कि राजनीति में गुटबाजी को संभालना नेता की जिम्मेदारी होती है और निशांत को इस कार्य को खुद संभालना होगा। विभिन्न विचारधाराओं वाले लोगों को एक साथ चलाना ही नेतृत्व की असली कसौटी होती है।

इस दौरान जब आरसीपी सिंह से जनता जदयू में फिर से शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। आरसीपी सिंह ने कहा कि उन्हें यह बात सहज नहीं लगती। करीब तीन महीने पहले ही एनडीए ने बिहार में विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा था, और उन्हें बड़ी सफलता भी मिली थी।

आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने हाल ही में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और वे लगातार सक्रिय हैं। वे विकास कार्यों की समीक्षा के लिए यात्रा कर रहे हैं, नई घोषणाएं कर रहे हैं और विधानसभा के बजट सत्र में भाग ले रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा जाने की चर्चाओं को लेकर कुछ परिस्थितियाँ संदेह पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल परिस्थितियों के आधार पर उठ रहा सवाल है, क्योंकि अंतिम निर्णय तो खुद नीतीश कुमार का ही होगा और उन पर कोई निर्णय थोपा नहीं जा सकता।

आरसीपी सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना होता, तो वह 2020 में ही बना सकती थी। उस समय जदयू को केवल 43 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को लगभग 74–75 सीटें प्राप्त हुई थीं।

उन्होंने बताया कि उस समय खुद नीतीश कुमार ने कहा था कि भाजपा अगर चाहे तो अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। लेकिन एनडीए के नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें समझाया कि उन्हें ही मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए। इसके बाद ही नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

आरसीपी सिंह ने कहा कि भाजपा भी यह जानती है कि बिहार में चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था और जनता का जनादेश भी काफी हद तक उनके नाम पर मिला था। ऐसे में उन्हें बदलना एक आसान निर्णय नहीं होगा

उन्होंने कहा कि अब यदि भविष्य में कोई परिवर्तन होता है, तो उस जनादेश को पूरा करने की ज़िम्मेदारी एनडीए के नेताओं पर होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि निशांत को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए अनुभव प्राप्त करना जरूरी है

आरसीपी सिंह के अनुसार बिहार में करीब 46 मंत्रालय हैं और इतने बड़े प्रशासनिक ढांचे को समझने के लिए अनुभव बेहद आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि किताबों से जानकारी मिल सकती है, लेकिन असली सीख तब मिलती है जब जिम्मेदारी मिलती है और कार्य करने का अवसर मिलता है।

Point of View

अंतिम निर्णय नीतीश कुमार और एनडीए के नेताओं पर छोड़ दिया गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक गुटबाजी और नेतृत्व की चुनौतियाँ अभी भी प्रमुख मुद्दे हैं।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

आरसीपी सिंह ने निशांत कुमार के बारे में क्या कहा?
आरसीपी सिंह ने कहा कि निशांत में राजनीतिक क्षमता है और उनका भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय नीतीश कुमार और एनडीए को लेना होगा।
क्या नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे?
आरसीपी सिंह ने कहा कि उन्हें यह बात सहज नहीं लगती और यह निर्णय नीतीश कुमार का ही होगा।
भाजपा ने बिहार में मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया?
आरसीपी सिंह के अनुसार, भाजपा अगर चाहती, तो 2020 में ही मुख्यमंत्री बना सकती थी, लेकिन नेतृत्व नीतीश कुमार के हाथ में रहने का निर्णय लिया गया।
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