लखनऊ में रामलीला स्थलों का विकास: 43.63 करोड़ की आठ परियोजनाओं की मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- लखनऊ में आठ नई रामलीला परियोजनाएं शुरू हो रही हैं।
- 43.63 करोड़ रुपये की लागत से इन परियोजनाओं का निर्माण होगा।
- मौजूदा रामलीला स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
- पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
लखनऊ, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक रामलीला स्थलों के विकास, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए संस्कृति विभाग ने 43.63 करोड़ रुपये की लागत से आठ नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में रामलीला मैदानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी जारी कर दी गई है और कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्ता मानकों के साथ कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सिसेंडी में रामलीला मैदान की बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए 56 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार ग्राम हिलगी और बरवलिया में भी क्रमशः 56 लाख और 60 लाख रुपये की लागत से बाउंड्रीवाल का निर्माण होगा। राजधानी के प्राचीन ऐशबाग रामलीला मैदान के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 129.60 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है, जिसके सापेक्ष 11 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि इस कार्य से ऐशबाग रामलीला मैदान का ऐतिहासिक गौरव पुनर्स्थापित होगा। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी परिसर में ओवरहेड वाटर टैंक की रंगाई-पुताई और क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल की मरम्मत के लिए 36.61 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार, बाउंड्रीवाल और आंतरिक सजावट के कार्यों के लिए 2458.49 लाख रुपये की परियोजना के तहत 8 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई है।
संस्कृति संग्रहालय एवं अनुष्ठान केंद्र में डिजाइन और क्यूरेशन कार्य के लिए 1107.53 लाख रुपये की परियोजना के तहत 553.36 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में फसाड लाइटिंग के लिए 287.49 लाख रुपये की परियोजना के तहत 83.09 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि कोरोना काल के बाद बेहतर कानून व्यवस्था और कनेक्टिविटी के चलते लखनऊ में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से राजधानी को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के पुनरुत्थान पर विशेष ध्यान दे रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।