18 अक्टूबर 2026
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मां तारा देवी महोत्सव 2026: बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने केसपा में की पूजा-अर्चना

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मां तारा देवी महोत्सव 2026: बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने केसपा में की पूजा-अर्चना

सारांश

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने गया जिले के केसपा गांव में मां तारा देवी महोत्सव 2026 में शिरकत की। उन्होंने महोत्सव को सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए गया क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

मुख्य बातें

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ.
प्रेम कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को केसपा गांव, गया में मां तारा देवी महोत्सव में भाग लिया।
उन्होंने महोत्सव को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बताया।
गया जी को विष्णु भक्ति, बौद्ध करुणा और सनातन परंपराओं के संगम स्थल के रूप में रेखांकित किया।
धार्मिक स्थलों के विकास से स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बनने की संभावना जताई।
युवा पीढ़ी से सांस्कृतिक विरासत पर गर्व कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को गया जिले के टिकारी विधानसभा क्षेत्र के केसपा गांव में आयोजित मां तारा देवी महोत्सव 2026 में भाग लिया। उन्होंने मां तारा देवी की पूजा-अर्चना कर बिहार सहित समूचे देश की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर डॉ. कुमार ने महोत्सव को भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बताया।

मुख्य संबोधन और संदेश

डॉ. प्रेम कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में देवी-देवताओं के प्रति आस्था महज पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे संस्कारों, जीवन-मूल्यों, सामाजिक एकता और नैतिक आदर्शों की आधारशिला है। उनके अनुसार, मां तारा देवी की आराधना श्रद्धालुओं को श्रद्धा, शक्ति, करुणा और लोककल्याण की प्रेरणा देती है।

विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन न केवल हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को उनकी आध्यात्मिक जड़ों से भी जोड़ते हैं।

गया की आध्यात्मिक विरासत का महत्त्व

डॉ. कुमार ने कहा कि बिहार की धरती आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान, तपस्या और सांस्कृतिक वैभव की दृष्टि से विश्वविख्यात है। उन्होंने रेखांकित किया कि गया जी की पावन भूमि पर भगवान विष्णु के प्रति आस्था, भगवान बुद्ध की करुणा और सनातन परंपराओं का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। यह विरासत विश्व को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश देती है।

सामाजिक समरसता और युवा पीढ़ी को आह्वान

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मां तारा देवी महोत्सव जैसे सामूहिक आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और समरसता को और सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने, संस्कारों को आत्मसात करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।

धार्मिक पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं

डॉ. प्रेम कुमार ने गया जी और उसके आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास की अपार संभावनाएं बताईं। उन्होंने कहा कि इन धार्मिक स्थलों का समुचित विकास होने पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

उन्होंने नागरिकों से धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने, स्वच्छता को प्राथमिकता देने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने की अपील भी की। महोत्सव के आयोजकों, मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय श्रद्धालुओं को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए उन्होंने मां तारा देवी से प्रत्येक परिवार की सुख-समृद्धि और बिहार की निरंतर प्रगति की कामना की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ ठोस बजटीय प्रावधान या नीतिगत रोडमैप की जानकारी सार्वजनिक नहीं है। महोत्सव के मंच से रोजगार की बात करना तब अधिक विश्वसनीय होगा जब सरकार गया क्षेत्र के पर्यटन बुनियादी ढाँचे के लिए समयबद्ध योजना प्रस्तुत करे।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां तारा देवी महोत्सव 2026 कहाँ और कब आयोजित हुआ?
मां तारा देवी महोत्सव 2026 का आयोजन 18 अक्टूबर 2026 को बिहार के गया जिले के टिकारी विधानसभा क्षेत्र स्थित केसपा गांव में हुआ। इस महोत्सव में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
डॉ. प्रेम कुमार ने महोत्सव में क्या कहा?
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि मां तारा देवी महोत्सव सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान भी किया।
गया जी में धार्मिक पर्यटन के विकास से क्या लाभ होगा?
डॉ. प्रेम कुमार के अनुसार, गया जी और आसपास के धार्मिक स्थलों के समुचित विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
बिहार की आध्यात्मिक विरासत में गया जी का क्या महत्त्व है?
गया जी को भगवान विष्णु के प्रति आस्था, भगवान बुद्ध की करुणा और सनातन परंपराओं के संगम-स्थल के रूप में जाना जाता है। यह स्थान विश्वभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है और शांति व सद्भाव का संदेश देता है।
महोत्सव में नागरिकों से क्या अपील की गई?
विधानसभा अध्यक्ष ने नागरिकों से धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने, स्वच्छता को प्राथमिकता देने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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