महाराष्ट्र में नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण की स्थापना, प्रदूषण नियंत्रण पर जोर: पंकजा मुंडे
सारांश
Key Takeaways
- नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण का गठन
- प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
- स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी
- अतिक्रमण हटाने के निर्देश
- वायु गुणवत्ता के सुधार के उपाय
पुणे, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को जानकारी दी कि राज्य सरकार नदी पुनर्जीवन के लिए एक विशेष प्राधिकरण के निर्माण के अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अब नदी सौंदर्यीकरण के बजाय पूर्ण प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में, जो पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) में आयोजित हुई, मंत्री ने बताया कि यह प्राधिकरण जल प्रदूषण पर निगरानी रखने और पर्यावरण नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कार्य करेगा।
मंत्री मुंडे ने बताया कि स्थानीय निकायों, निजी संस्थानों और उद्योगों द्वारा बिना उपचारित सीवेज का नदियों में सीधे प्रवाह एक गंभीर समस्या बन चुका है। कई उद्योगों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तो स्थापित हैं, लेकिन उनके खराब रखरखाव के कारण वे काम नहीं कर रहे।
उन्होंने चेतावनी दी, "अब केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
मंत्री ने निर्देश दिए कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम नदियों के किनारों पर किए गए अतिक्रमण को तुरंत हटाएं। हर आवासीय सोसाइटी में अपना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अनिवार्य किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर नाला एसटीपी से जुड़े, ताकि नदियों में केवल शुद्ध पानी पहुंचे।
बैठक में वायु गुणवत्ता पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि निर्माण स्थलों पर उचित कवरिंग न होने से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे स्थलों पर तुरंत नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इस दौरान इंद्रायणी, पवना और मुला-मुठा नदियों के पुनर्जीवन के लिए तकनीकी प्रस्तुतियां भी दी गईं।
बैठक के बाद मंत्री ने तलावडे (इंद्रायणी नदी) और रावेत (पवना नदी) स्थित रॉ वॉटर पंपिंग स्टेशनों का निरीक्षण किया। उन्होंने इंद्रायणी नदी में जहरीला झाग, सीवेज और जलकुंभी देखकर गहरी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, "इंद्रायणी नदी की पवित्रता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।" अधिकारियों को जलकुंभी हटाने और औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
मंत्री ने कहा कि सरकार कड़े कदम उठा रही है, लेकिन स्वच्छ और अविरल नदियां तभी संभव हैं जब नागरिक सहयोग करें और उद्योग नियमों का सख्ती से पालन करें।