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क्या मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक विशेष आयोजन होते हैं?

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क्या मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक विशेष आयोजन होते हैं?

सारांश

मकर संक्रांति का पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में विशेष तरीके से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है, जबकि उत्तर भारत में खिचड़ी का महत्व है। जानिए इस पर्व के विभिन्न धार्मिक आयोजनों और भोगों के बारे में।

मुख्य बातें

मकर संक्रांति का पर्व विभिन्न रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
दक्षिण भारत में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है।
इस दिन विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं।
यह त्यौहार धार्मिकता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
खिचड़ी का दान इस दिन विशेष महत्व रखता है।

नई दिल्ली, ११ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मकर संक्रांति का त्योहार भारत के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बेहद अद्भुत और भव्य तरीके से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है, और यह चार दिनों तक विभिन्न तरीकों से इस सूर्य प्रधान उत्सव का आनंद लिया जाता है। इस दौरान कई प्रमुख मंदिरों में विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं।

ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विशेष वेशभूषा के साथ ८४ प्रकार के व्यंजन भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाते हैं, जिसे मकर चौरासी भोग कहा जाता है। इसमें चावल, गुड़, केला, नारियल, बड़ी, झिली, गजा, काकेरा, अमलू, फल और कई प्रकार की मिठाइयाँ शामिल होती हैं।

इसके अलावा, अरिसा पीठा का भोग भी लगाया जाता है, जो चावल के आटे और गुड़ से बनता है। मकर संक्रांति के दिन भगवान जगन्नाथ को चार अलग-अलग समय पर विभिन्न भोग अर्पित किए जाते हैं।

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में इस अवसर पर भगवान अयप्पा को विशेष आभूषणों से सजाया जाता है और अरवाणा पायसम और अप्पम का भोग अर्पित किया जाता है। अरवाणा पायसम चावल, घी और गुड़ से बना एक मीठा प्रसाद है, जबकि अप्पम चावल के आटे और गुड़ से बना एक और स्वादिष्ट व्यंजन है, जो भगवान को बहुत पसंद है।

उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान के साथ-साथ तिल, गुड़ और चावल-उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाता है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का भोग अर्पित करने की परंपरा बहुत पुरानी है और लगभग उत्तर भारत के हर घर में इस दिन खिचड़ी का सेवन किया जाता है और उसका दान भी किया जाता है।

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी बाबा विश्वनाथ को सब्जियों के साथ बनी खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें मौसमी सब्जियों का मिश्रण होता है। यह उदड़ दाल की खिचड़ी से काफी भिन्न होती है। इसके अतिरिक्त, भगवान शिव को तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ भी अर्पित की जाती हैं।

गुजरात के सोमनाथ और द्वारकाधीश मंदिर में भगवान शिव और विष्णु को ५६ भोग अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ-साथ ऊंधियू और जलेबी का विशेष भोग भी अर्पित किया जाता है। ऊंधियू एक मिश्रित सब्जी है, जिसमें लगभग ६ से ८ सब्जियाँ शामिल होती हैं। मंदिर में सात अनाज वाली खिचड़ी का भी भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, तिल और मूंगफली की चिक्की, काली तिल के लड्डू और चावल-मूंग की दाल की खिचड़ी का भोग भी अर्पित किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि मकर संक्रांति जैसे त्योहार न केवल धार्मिकता का प्रतीक हैं, बल्कि यह भारतीय समाज की विविधता और एकता को भी दर्शाते हैं। इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं और लोगों को एकजुट करते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति किस दिन मनाई जाती है?
मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है।
मकर संक्रांति पर क्या विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं?
इस दिन तिल, गुड़, और खिचड़ी जैसे विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं।
दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को क्या कहते हैं?
दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है।
मकर संक्रांति का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?
यह त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
क्या मकर संक्रांति पर दान का महत्व है?
हाँ, इस दिन दान करने का विशेष महत्व है, विशेष रूप से खिचड़ी का दान।
राष्ट्र प्रेस
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