क्या मकर संक्रांति पर इस मंदिर में सूर्य खुद भगवान शिव का राजतिलक करते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर अद्भुत दृश्य होता है।
- सूर्य भगवान शिव का राजतिलक करते हैं।
- दूध का प्रसाद दही के रूप में वितरित किया जाता है।
- यह मंदिर आस्था और विज्ञान का संगम है।
- स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विभिन्न हिस्सों में भगवान शिव के अनेक चमत्कारी मंदिर हैं, जहां भक्त अपने कष्टों से मुक्ति पाने आते हैं। बेंगलुरु में भगवान शिव का एक विशेष मंदिर है, जहां मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य निर्धारित समय पर शिवलिंग का तिलक करते हैं।
हम बात कर रहे हैं गवी गंगाधरेश्वर मंदिर की, जहां विज्ञान की आस्था पर भारी पड़ती है। कर्नाटक के बेंगलुरु के गाविपुरम में महादेव को समर्पित गवी गंगाधरेश्वर मंदिर को तीन हजार साल पुराना माना जाता है। "गवी" का अर्थ "गुफा" है, और "गंगाधरेश्वर" का अर्थ "महादेव" है। इस मंदिर में बाबा गुफानुमा मंदिर के भीतर विराजमान हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां ऐसा कुछ होता है, जो साल में केवल एक बार होता है।
मकर संक्रांति को शाम 5 बजे के आसपास जब सूरज अस्त होने की स्थिति में होता है, तब सूर्य की किरणें पहले मंदिर के बाहर लगे स्तंभों से टकराकर अंदर प्रवेश करती हैं और फिर नंदी महाराज के सींग को छूते हुए सीधे गर्भगृह में स्थित शिवलिंग को स्पर्श करती हैं।
साल में एक बार ही ऐसा होता है, जब बाहरी प्रकाश मंदिर के अंदर इस प्रकार से पहुंचता है। यह माना जाता है कि अपनी दिशा बदलते समय सूर्य भगवान महादेव का राजतिलक कर आशीर्वाद लेने आते हैं।
मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव को अर्पित किया गया दूध, छाछ या दही बन जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मंदिर प्रशासन भगवान शिव पर चढ़ाए गए दूध का संग्रह करता है और उसे दही बनाकर अगले दिन भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित करता है।
मंदिर प्रशासन का मानना है कि वे किसी भी खाने की वस्तु को बर्बाद नहीं होने देते। इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा हर जगह होती है।
मंदिर प्रशासन इस बात का भी ध्यान रखता है कि दूध में सिंदूर या कोई अन्य चीज न मिले। स्वच्छता के साथ दूध को अलग किया जाता है और उसे फर्मेंट करके छाछ बना दिया जाता है। केवल मंदिर से जुड़े लोग ही दूध का संग्रह करते हैं और स्वच्छ दूध से छाछ बनाते हैं।