क्या मालदा में वाम मोर्चा ने गंगा नदी के कटाव से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग की?

सारांश
Key Takeaways
- गंगा नदी का कटाव गंभीर समस्या है।
- वाम मोर्चा ने प्रदर्शन कर महत्वपूर्ण मांगें उठाई।
- सरकार को समस्या का समाधान निकालना चाहिए।
- कटाव से प्रभावित लोग पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
- स्थायी बांध निर्माण की आवश्यकता है।
मालदा, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वाम मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मालदा शहर के ग्रीन पार्क क्षेत्र में सिंचाई विभाग के समक्ष एक जुलूस निकाला।
मालदा जिला वाम मोर्चा ने गंगा नदी के कटाव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध कराने जैसे कई मांगों के साथ सिंचाई विभाग के समक्ष प्रदर्शन किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गेट के सामने भारी पुलिस बल पहले से तैनात था। बैरिकेड लगाए गए थे, लेकिन वाम मोर्चा के नेता और कार्यकर्ता बैरिकेड को हटाते हुए कार्यालय के मुख्य द्वार को तोड़कर अंदर घुस गए। वहां उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर तख्तियों और पार्टी के झंडों के साथ प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अपना मांग पत्र सौंपा।
पूर्व सिंचाई मंत्री सुभाष नस्कर, वाम मोर्चा के नेता शतरूप घोष, कौशिक मिश्रा, अंबर मित्रा, देबज्योति सिन्हा और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
पिछले कुछ हफ्तों से मालदा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गंगा और फुलहर नदियों का कटाव हो रहा है, जिससे कई लोग प्रभावित हो रहे हैं। कटावग्रस्त क्षेत्रों में लोग अपनी खेती और भूमि खोकर खुले आसमान के नीचे निवास कर रहे हैं। जिला वाम मोर्चा की पहल पर कटावग्रस्त क्षेत्रों के लोगों के पुनर्वास और भुटनी इलाके में स्थायी बांध के निर्माण की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
वाम मोर्चा के नेताओं ने बताया कि कटाव के कारण कई गांव नदी में समाहित हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य का दौरा किया, लेकिन इस समस्या पर कभी कोई बात नहीं की।