क्या मणिपुर में ऑपरेशन 'खानपी' में चार उग्रवादी ढेर हुए? सेना का अभियान जारी है

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क्या मणिपुर में ऑपरेशन 'खानपी' में चार उग्रवादी ढेर हुए? सेना का अभियान जारी है

सारांश

मणिपुर में खुफिया सूचना पर आधारित एक अभियान के दौरान चार उग्रवादी मारे गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा की गई इस कार्रवाई के पीछे हाल के अत्याचारों का जवाब है, जिसमें स्थानीय ग्राम प्रधान की हत्या शामिल है। क्या यह अभियान मणिपुर में सुरक्षा को बहाल करने में मदद करेगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मुख्य बातें

खुफिया सूचना पर आधारित अभियान में चार उग्रवादी मारे गए।
सुरक्षा बलों ने स्थानीय ग्राम प्रधान की हत्या का जवाब दिया।
मणिपुर में जातीय तनाव के कारण हिंसा बढ़ी है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अभियान अभी भी जारी है, तलाशी अभियान चल रहे हैं।

इंफाल, 4 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में मंगलवार को अचानक दहशत का माहौल बन गया, जब खुफिया सूचना के आधार पर एक अभियान के दौरान उग्रवादियों ने भारतीय सेना और असम राइफल्स की टुकड़ी पर गोलीबारी शुरू कर दी।

यह घटना खानपी गांव के पास, जिले से लगभग 80 किलोमीटर पश्चिम में, हेंगलेप उपमंडल के जंगली क्षेत्र में हुई। बिना किसी उकसावे के की गई इस फायरिंग के जवाब में सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसमें यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (यूकेएनए) के चार सशस्त्र कार्यकर्ता मारे गए। अभियान अभी भी जारी है और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब छह बजे शुरू हुई। सुरक्षा बल खानपी के जंगलों में यूकेएनए के संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी कर रहे थे। अचानक उग्रवादियों ने छिपकर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में चार उग्रवादी ढेर हो गए।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, ये यूकेएनए के सक्रिय सदस्य थे, जो एक गैर-एसओओ (सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस) विद्रोही समूह से जुड़े हैं। इस समूह के कार्यकर्ता दक्षिणी मणिपुर के पहाड़ी जिलों में सक्रिय रहते हैं। गोलीबारी के बाद घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए।

यह ऑपरेशन यूकेएनए के हालिया अत्याचारों के जवाब में चलाया गया था। समूह के कार्यकर्ताओं ने चुराचांदपुर में एक ग्राम प्रधान की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इसके अलावा, उन्होंने स्थानीय लोगों को बार-बार धमकाया और इलाके में शांति और स्थिरता को बाधित करने की कोशिश की। ग्राम प्रधान हाओकिप की हत्या 28 अक्टूबर को टी खोनोम्फाई गांव में हुई, जहां उग्रवादियों ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला।

परिवार और पुलिस के अनुसार, यह हमला किसी पुरानी रंजिश या वसूली से जुड़ा हो सकता है। यूकेएनए पर पहले भी वसूली, धमकी और हिंसा के कई मामले दर्ज हैं।

भारतीय सेना और असम राइफल्स ने इस सफल कार्रवाई को निर्दोष नागरिकों की रक्षा करने और सभी खतरों को कम करने की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है। मणिपुर में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा बल लगातार ऐसे अभियान चला रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल के महीनों में राज्य में जातीय तनाव के कारण हिंसा बढ़ी है, जिसमें मई 2023 से अब तक 260 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 60 हजार से अधिक विस्थापित हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम मणिपुर में सुरक्षा बलों के प्रयासों को समर्थन दें। ये अभियान न केवल उग्रवादियों के खिलाफ हैं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे अभियान राज्य में शांति और स्थिरता लाने में मदद करें।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में ऑपरेशन 'खानपी' का क्या महत्व है?
यह ऑपरेशन हाल के उग्रवादी हमलों के जवाब में चलाया गया है और इसका उद्देश्य मणिपुर में सुरक्षा बहाल करना है।
कितने उग्रवादी मारे गए?
इस अभियान में चार उग्रवादी मारे गए हैं।
क्या यह अभियान नागरिकों की सुरक्षा के लिए है?
जी हां, यह अभियान निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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