मनीषा कोइराला का महिलाओं को संदेश: मेनोपॉज से डरें नहीं, बदलते शरीर के साथ काम करें
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने शनिवार, 18 अक्टूबर 2026 को अपने इंस्टाग्राम पर एक वर्कआउट वीडियो साझा करते हुए महिलाओं से अपने बदलते शरीर को स्वीकार करने और सेहत को प्राथमिकता देने की भावपूर्ण अपील की। ओवेरियन कैंसर सर्वाइवर मनीषा ने मेनोपॉज, उम्र से जुड़े हार्मोनल बदलावों और फिटनेस पर खुलकर बात करते हुए कहा कि यह दौर कमज़ोरी नहीं, बल्कि नई ताकत की शुरुआत है।
वीडियो में क्या दिखाया
अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में अभिनेत्री जिम में डंबल उठाते और चेस्ट एक्सरसाइज करते नज़र आईं। यह वीडियो महज एक फिटनेस क्लिप नहीं था — इसके साथ लिखे कैप्शन में उन्होंने मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर गहरी बात की। गौरतलब है कि मनीषा खुद ओवेरियन कैंसर को मात दे चुकी हैं, इसलिए उनकी बात में व्यक्तिगत अनुभव की गहराई है।
मेनोपॉज पर क्या कहा
मनीषा ने लिखा, 'मेनोपॉज हमारी ताकत का अंत नहीं है बल्कि खुद का ख्याल रखने का एक नया चैप्टर है।' उन्होंने बताया कि हार्मोनल बदलाव हड्डियों, मसल्स, नींद, मूड और मेटाबॉलिज्म — इन सभी पहलुओं पर असर डाल सकते हैं। उनका संदेश था कि इस दौर का सामना डर से नहीं, बल्कि मज़बूती से किया जा सकता है।
महिलाओं को क्या सलाह दी
अभिनेत्री ने महिलाओं से अपनी दिनचर्या में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल करने, पौष्टिक आहार लेने और बिना किसी अपराधबोध के भरपूर आराम करने की अपील की। उन्होंने लिखा, 'व्यायाम कीजिए, अच्छा खाइए और अपने शरीर को पोषण दीजिए, आराम कीजिए, खुद की सुनिए और जरूरत पड़ने पर मदद लीजिए।'
बदलते शरीर को स्वीकारने की अपील
मनीषा ने ज़ोर देकर कहा कि महिलाओं को अपने शरीर से लड़ने की नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने लिखा, 'हमें अपने बदलते शरीर से लड़ने की जरूरत नहीं है। हमें उसके साथ काम करना है। यह पड़ाव अभी तक का हमारा सबसे मजबूत पड़ाव हो सकता है।' यह संदेश उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है जो मेनोपॉज के दौर से गुज़र रही हैं या इससे जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
फिल्मी करियर का ताज़ा अपडेट
मनीषा कोइराला आखिरी बार 2024 में निर्देशक संजय लीला भंसाली की नेटफ्लिक्स पीरियड ड्रामा सीरीज 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' में मल्लिका जान के किरदार में नज़र आई थीं, जिसने दर्शकों और आलोचकों से खूब सराहना बटोरी थी। सेहत और स्वास्थ्य के प्रति उनकी यह सजगता उनके व्यक्तिगत संघर्ष और पुनरुत्थान की कहानी को और भी प्रासंगिक बनाती है।