क्या मोरबी बना भारत की ‘सिरेमिक राजधानी’ 90 प्रतिशत निर्यात हिस्सेदारी के साथ?
सारांश
Key Takeaways
- मोरबी का सिरेमिक उद्योग भारत का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादक केंद्र है।
- यह क्षेत्र वर्ष 2024-25 में 15,000 करोड़ रुपए का निर्यात कर सकता है।
- मोरबी में लगभग 1200 सिरेमिक इकाइयां हैं।
- यहां 9 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।
- मोरबी भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 80 से 90 प्रतिशत का योगदान देता है।
गांधीनगर, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में, गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) कच्छ-सौराष्ट्र के दूसरे संस्करण की तैयारियों में जुटा है। यह सम्मेलन 11 एवं 12 जनवरी, 2026 को राजकोट में आयोजित होगा, जहां कच्छ और सौराष्ट्र के हिस्से के रूप में कई कार्यक्रम होंगे।
मोरबी जिला, जो सिरेमिक उद्योग का अग्रणी क्षेत्र है, आज भारत की सिरेमिक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। मोरबी, जो गुजरात के कुल सिरेमिक उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, दुनिया का दूसरा बड़ा सिरेमिक उत्पादन स्थान है।
मोरबी आज देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिरेमिक उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां पहले मिट्टी के परंपरागत बर्तन, दीये और खपरैलों का निर्माण होता था। स्थानीय मिट्टी की गुणवत्ता और कुशल कारीगरों ने मोरबी के उत्पादों को नई पहचान दी। बाद में, वॉल क्लॉक उद्योग की शुरुआत हुई।
समय के साथ, 1970-80 के दशक में रूफ टाइल्स और ग्लेज्ड टाइल्स का उत्पादन शुरू हुआ और मोरबी ने आधुनिक सिरेमिक उद्योग में कदम रखा। नई तकनीक और उन्नत मशीनरी ने इस शहर को सिरेमिक क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दी। आज, मोरबी फ्लोर टाइल्स, वॉल टाइल्स और विट्रिफाइड टाइल्स के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
इस वर्ष राजकोट में आयोजित होने वाली दूसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में मोरबी के सिरेमिक क्लस्टर की एक विशेष प्रदर्शनी होगी। इसमें ‘अद्यतन सिरेमिक्स’, ‘वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स’, ‘एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी’, और नए ‘सिरेमिक पार्क’ की प्रगति को प्रमुखता दी जाएगी। सरकार उद्योगों के लिए तकनीकी उन्नयन, ऑटोमेशन, और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। मोरबी के उद्यमियों की मेहनत और सरकारी नीतियों के कारण आज मोरबी को भारत की ‘सिरेमिक राजधानी’ कहा जाता है।
मोरबी जिले का सिरेमिक क्लस्टर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादक क्लस्टर है, जिसमें लगभग 1200 सिरेमिक इकाइयां हैं, जिनका कुल वार्षिक उत्पादन लगभग 60 लाख टन है। ये इकाइयां 9 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार देती हैं।
पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने मोरबी जिले में कई सरकारी सहायता योजनाओं के तहत व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की है, जो जिले के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण रही है। पिछले दो वित्तीय वर्षों में लगभग 2200 लाभार्थियों को 115 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता मिली है। इस सहायता ने मोरबी के नागरिकों को स्वरोजगार और उद्योग में नए अवसर दिए हैं।
मोरबी का सिरेमिक उद्योग वैश्विक बाजार में गुजरात और भारत की पहचान बना रहा है। 2024-25 के दौरान मोरबी से लगभग 15,000 करोड़ रुपए का निर्यात होने की उम्मीद है। मोरबी भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 80 से 90 प्रतिशत का योगदान देता है। यहां के उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पाद अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ओमान और श्रीलंका में निर्यात होते हैं।
मोरबी जिला पॉलीपैक उद्योग में भी एक अग्रणी जिला बन सकता है। यहां 150 पॉलीप्रोपाइलिन वूवन उत्पाद की इकाइयां कार्यरत हैं, जो सालाना 5 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन करती हैं। यह उद्योग मोरबी के 25 से 20 हजार लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
सिरेमिक और पॉलीपैक के अलावा, मोरबी में वॉल क्लॉक और गिफ्ट आर्टिकल उद्योग भी विकसित हो रहा है। भारत में वॉल क्लॉक उत्पादन में मोरबी का योगदान सबसे अधिक है। यहां 150 से 200 वॉल क्लॉक इकाइयां हैं, जो 10 से 12 हजार लोगों को रोजगार देती हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत महिलाएं हैं।