नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा: कालकाजी मंदिर के महंत ने बताए सिद्ध मंत्र और विधान
सारांश
मुख्य बातें
नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के षष्ठ स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना का विशेष विधान है। नई दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस दिन के धार्मिक महत्व को विस्तार से समझाया और बताया कि यह दिन विशेष रूप से उन कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो सुयोग्य वर की कामना रखती हैं। भक्त आज विधि विधान से पूजा अर्चना कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
मां कात्यायनी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि कत के पोते ऋषि कात्यायन ने देवी आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी। उन्होंने देवी से अपने घर पुत्री के रूप में अवतार लेने का वरदान माँगा था। ऋषि की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहाँ पुत्री रूप में जन्म लिया। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण ही उनका नाम कात्यायनी पड़ा और वे इसी नाम से सारे संसार में विख्यात हुईं।
मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप
महंत ने मां कात्यायनी के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया कि मां शेर पर सवार हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं। एक हाथ में कमल का पुष्प, दूसरे में चमकदार तलवार सुशोभित है, जबकि शेष दो हाथ क्रमशः अभयमुद्रा और वरदमुद्रा में हैं। उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी है — वे आसुरी शक्तियों और अधर्म के विनाश के लिए सदा तत्पर रहती हैं।
कुंवारी कन्याओं के लिए सिद्ध मंत्र
महंत ने बताया कि द्वापर युग में देवी रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए मां कात्यायनी का पूजन किया था। यह मान्यता आज भी उनकी आराधना को वैवाहिक जीवन की बाधाएँ दूर करने वाली देवी के रूप में स्थापित करती है।
कुंवारी कन्याओं के लिए महंत ने निम्न सिद्ध मंत्र बताया:
"ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥ स्वाहा ॥"
उनके अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक अनुष्ठान करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
स्तुति मंत्र और महिमा
महंत ने एक और महत्वपूर्ण स्तुति मंत्र साझा किया:
"चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥"
उनके अनुसार जो भक्त सच्चे मन से इस मंत्र की स्तुति करता है, मां उस पर प्रसन्न होकर मनोवांछित वरदान देती हैं। नवरात्र का यह छठा दिन भक्तों के लिए साधना, भक्ति और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर है, और मां कात्यायनी की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव की कामना आज देशभर में लाखों भक्त कर रहे हैं।