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एनजीटी ने एमसीडी को गाजीपुर लैंडफिल के लिए समय-सीमा आधारित योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया

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एनजीटी ने एमसीडी को गाजीपुर लैंडफिल के लिए समय-सीमा आधारित योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया

सारांश

दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल के मुद्दे पर एनजीटी ने एमसीडी को एक एक्शन प्लान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस योजना में पुराने कचरे को हटाने और नए कचरे के प्रबंधन के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाएगी।

मुख्य बातें

एनजीटी ने एमसीडी को समय-सीमा आधारित योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गाजीपुर लैंडफिल में कचरे का उचित प्रबंधन आवश्यक है।
अगली सुनवाई 6 जुलाई को होने वाली है।
जमीनी स्थिति की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया था।
कचरे के प्रबंधन में गंभीर कमियां पाई गई हैं।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को गाजीपुर लैंडफिल साइट से पुराने कचरे को हटाने और रोजाना आने वाले कचरे के उचित प्रबंधन के लिए एक निर्धारित समय-सीमा वाला एक्शन प्लान प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

यह आदेश चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ द्वारा जारी किया गया। उन्होंने एमसीडी को कोर्ट कमिश्नर की स्टेटस रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों की जांच के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया है।

यह मामला स्वतः संज्ञान में लिया गया था, जिसका आरंभ एक मीडिया रिपोर्ट से हुआ, जिसमें गाजीपुर लैंडफिल साइट पर बार-बार लगने वाली आग और उससे उत्पन्न धुएं की पर्यावरणीय समस्याओं को उजागर किया गया था।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एमसीडी को यह भी बताना होगा कि वह वहां जमा कचरे को किस प्रकार हटाएगा और रोजाना आने वाले कचरे का कैसे निपटान करेगा, यह सब एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। एनजीटी अप्रैल 2024 से गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कचरे के अनुचित प्रबंधन के मामले पर ध्यान रख रहा है। उस समय वहां एक बड़ी आग लगी थी, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में धुआं फैल गया था और लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता उत्पन्न हुई थी।

इससे पहले, मार्च 2025 में एमसीडी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्टों में भिन्नता पाए जाने के बाद एनजीटी ने जमीनी स्थिति की जांच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था।

जांच रिपोर्ट में कोर्ट कमिश्नर ने कई गंभीर कमियों का उल्लेख किया था, जिनमें लैंडफिल की ऊंचाई निर्धारित सीमा से अधिक होना, बाउंड्री वॉल का न होना जिससे कचरा निकटवर्ती नालों में फैल रहा है, और लीचेट (कचरे से निकलने वाला प्रदूषित पानी) के उचित प्रबंधन की कमी शामिल है, जिससे यमुना में जाने वाले नालों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।

इन कमियों को ध्यान में रखते हुए ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पहले ही एमसीडी को निर्देश दिया था कि वह कचरे के प्रोसेसिंग, पुराने कचरे की बायोमाइनिंग और आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस और समयबद्ध योजना तैयार करे।

इसके बाद, अक्टूबर 2025 में एनजीटी ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के उपयोग और उससे उत्पन्न बिजली की मात्रा के बारे में भी जानकारी मांगी थी। इसके साथ ही, यह भी देखा जा रहा था कि संबंधित अधिकारी नियमों का सही पालन कर रहे हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा है। गाजीपुर लैंडफिल के प्रभाव से न केवल स्थानीय निवासियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह राष्ट्रीय पर्यावरण के लिए भी खतरा है। यह कदम जिम्मेदारियों को समझने और सुधारात्मक उपायों को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजीपुर लैंडफिल की समस्या क्या है?
गाजीपुर लैंडफिल में कचरे का अत्यधिक संचय और उसके अनुचित प्रबंधन से पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जैसे आग लगना और प्रदूषण।
एनजीटी ने एमसीडी को क्या निर्देश दिया?
एनजीटी ने एमसीडी को गाजीपुर लैंडफिल से पुराने कचरे को हटाने और नए कचरे के प्रबंधन के लिए एक समय-सीमा वाला एक्शन प्लान प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।
क्या एनजीटी ने कोई जांच की है?
हाँ, एनजीटी ने जमीनी स्थिति की जांच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था और कई गंभीर कमियों की पहचान की थी।
क्या एमसीडी की रिपोर्ट में अंतर पाया गया था?
जी हाँ, एनजीटी ने एमसीडी और सीपीसीबी की रिपोर्टों में भिन्नता पाए जाने पर जांच का आदेश दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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