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क्या एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों पर शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा?

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क्या एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों पर शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा?

सारांश

क्या एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों पर शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा? जानिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्या चर्चा हुई और किस प्रकार तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मुख्य बातें

एनएचएआई का शून्य मृत्यु दर का उद्देश्य 2030 तक 50% कमी लाना है।
सड़क सुरक्षा के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर इंटरैक्टिव सत्र शामिल थे।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण है।
एनएचएआई द्वारा विशेष शमन उपाय कार्यक्रम शुरू किया गया है।

नई दिल्ली, 4 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्युओं को कम करने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देशभर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों के अपने सड़क सुरक्षा अधिकारियों और सड़क सुरक्षा लेखा परीक्षकों के लिए नई दिल्ली में एक दिवसीय सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि केएन श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) नागरिक उड्डयन सचिव एवं निदेशक, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली मौजूद थे। एनएचएआई के सदस्य (प्रशासन) विशाल चौहान और एनएचएआई मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के सहयोग से आयोजित किया गया था।

इस दिनभर के प्रशिक्षण सत्र में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से चर्चा की गई। इसमें विशेष रूप से विकसित ड्रोन आधारित एआई और एमएल मॉड्यूल- ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएएमएस) द्वारा दुर्घटनाओं के कारणों की प्रारंभिक पहचान, दुर्घटना स्थलों की विस्तृत निरीक्षण प्रक्रिया और सुरक्षित गलियारों के लिए विशिष्ट शमन उपायों को अंतिम रूप देना शामिल था।

केएन श्रीवास्तव ने कहा, "मैं देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के कायाकल्प के लिए एनएचएआई को बधाई देना चाहता हूं। हालांकि सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण पहलू है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह प्रशिक्षण सत्र अधिकारियों को ऐसी रणनीतियों को विकसित करने और लागू करने में मदद करेगा जो सड़क सुरक्षा को बढ़ाएंगी। सड़क सुरक्षा के मुद्दे को विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उपयोगकर्ता का व्यवहार और सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन शामिल है। इनका समाधान आधुनिक तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है।"

एनएचएआई के सदस्य (प्रशासन) विशाल चौहान ने कहा, "सड़क सुरक्षा बढ़ाने के तीन महत्वपूर्ण आयामों में इंजीनियरिंग हस्तक्षेप, मानव व्यवहार और वाहन इंजीनियरिंग शामिल हैं। सड़क सुरक्षा बढ़ाने में ई-डीएआर जैसी तकनीक के उपयोग से ब्लैकस्पॉट की पहचान में मदद मिली है। हम राष्ट्रीय राजमार्गों पर 'शून्य मृत्यु दर' के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं। इसके लिए हमें हितधारकों के बीच अधिक सहयोग और डेटा-आधारित रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता है।"

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर शून्य मृत्यु दर प्राप्ति (जेडएफए) दृष्टिकोण के कार्यान्वयन की परिकल्पना की है। जेडएफए पहल का उद्देश्य इंजीनियरिंग हस्तक्षेप, प्रवर्तन समन्वय, आपातकालीन प्रतिक्रिया सुधार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली मौतों और गंभीर चोटों के कारणों की वैज्ञानिक रूप से पहचान करना है।

इस पहल के तहत, एनएचएआई ने विशेष सड़क इंजीनियरिंग शमन उपाय कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके अंतर्गत 6,948 महत्वपूर्ण स्थानों पर कार्य किया जाएगा। इसके अलावा, वर्ष 2023 और 2024 के लिए ई-डीएआर प्रणाली से प्राप्त दुर्घटना आंकड़ों के गहन विश्लेषण के आधार पर एक सड़क सुरक्षा कार्य योजना तैयार की गई है।

2030 के अंत तक सड़क दुर्घटनाओं में हताहतों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी लाने के केंद्र सरकार के मिशन के अंतर्गत, इस प्रशिक्षण सत्र में सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं की गहन समझ प्रदान की गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह एक सकारात्मक कदम है जो सभी सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचएआई का शून्य मृत्यु दर का लक्ष्य क्या है?
एनएचएआई का लक्ष्य है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली हताहतों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी लाए।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्या विशेष तकनीक का उपयोग किया गया?
इस कार्यक्रम में ड्रोन आधारित एआई और एमएल मॉड्यूल- ड्रोन एनालिटिक्स मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएएमएस) का उपयोग किया गया।
सड़क सुरक्षा के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं?
एनएचएआई इंजीनियरिंग हस्तक्षेप, प्रवर्तन समन्वय, आपातकालीन प्रतिक्रिया सुधार और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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