ऑपरेशन सिंदूर पर 'सच' बोलना पड़ा भारी: नूरीन नियाजी को पाकिस्तानी साइबर एजेंसी का समन
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी को पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर क्राइम जांच एजेंसी (NCCIA) ने 20 जुलाई 2025 को इस्लामाबाद स्थित अपने कार्यालय में तलब किया है। यह समन ऑपरेशन सिंदूर पर उनके उस वायरल वीडियो के बाद जारी हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया कि भारतीय हमलों के सामने पाकिस्तानी सेना की स्थिति बेहद कमज़ोर हो गई थी। एजेंसी ने 18 जुलाई को जारी नोटिस में उन पर राज्य संस्थानों को बदनाम करने और 'फर्जी नैरेटिव' फैलाने का आरोप लगाया है।
क्या कहा नूरीन नियाजी ने
एक इंटरव्यू में नूरीन नियाजी ने कहा, 'पाकिस्तान की फौजी ताकतों की हालत भारतीय हमले के सामने बहुत खराब हो गई थी। भारत के हमले के बाद पाकिस्तान ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया। पाकिस्तानी सेना इसे संभालने में पूरी तरह से विफल रही।' उनके अनुसार, इसके बाद रावलपिंडी के फौजी मुख्यालय में हड़बड़ी मच गई और जिस सैन्य अभियान को 'मारका-ए-हक' नाम दिया गया था, वह बुरी तरह विफल होने लगा।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव और समझौते का दावा
नियाजी के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर पाकिस्तानी नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारत के साथ समझौता कराने की गुहार लगाई। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले इस मामले से दूर थे, पाकिस्तान के सामने कुछ शर्तें रखकर मध्यस्थता को तैयार हो गए। नियाजी के मुताबिक इन शर्तों में इजरायल को मान्यता देना और अब्राहम अकोर्ड से जुड़ना शामिल था। उन्होंने दावा किया कि भारतीय हमलों से 'बौखलाया' पाकिस्तानी सैन्य प्रशासन इन शर्तों पर तुरंत राज़ी हो गया।
गौरतलब है कि ये दावे नूरीन नियाजी के निजी बयान हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
NCCIA का समन और कानूनी चेतावनी
प्रमुख पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, 18 जुलाई को जारी नोटिस में एजेंसी ने कहा कि नूरीन पर 'राज्य संस्थानों को बदनाम करने और फर्जी नैरेटिव फैलाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर भ्रामक, आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री साझा करने' का आरोप है। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि यदि वे 20 जुलाई को उपस्थित नहीं होती हैं, तो माना जाएगा कि उनके पास अपने बचाव में कुछ नहीं है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि नोटिस की अनदेखी पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 174 के तहत दंडनीय अपराध है।
हालांकि, नोटिस में किसी विशेष पोस्ट या बयान का उल्लेख नहीं किया गया है। यह समन ठीक उसी समय जारी हुआ जब उनका ऑपरेशन सिंदूर संबंधी वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा था।
सैन्य 'जीत' का नैरेटिव और आंतरिक विरोधाभास
नियाजी ने यह भी आरोप लगाया कि संघर्ष समाप्त होने के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जनता के बीच इसे अपनी 'जीत' के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, सैन्य प्रशासन चाहता था कि इस 'जीत' के उत्साह में इजरायल को मान्यता देने से उठने वाले संभावित आक्रोश को दबाया जा सके, लेकिन ईरान से जुड़े घटनाक्रम के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
क्या होगा आगे
यह मामला पाकिस्तान में असहमति की आवाज़ों पर बढ़ते दबाव का एक और उदाहरण माना जा रहा है, विशेषकर उन लोगों पर जो सेना की आधिकारिक लाइन से अलग राय रखते हैं। नूरीन नियाजी इमरान खान की करीबी रही हैं और खान के राजनीतिक दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से जुड़ी हैं। आलोचकों का कहना है कि यह समन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश है, जबकि एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई साइबर कानूनों के तहत की जा रही है।