ऑपरेशन सिंदूर: उत्तरी अरब सागर में तैनात थे INS विक्रांत समेत युद्धपोत, पनडुब्बियाँ और कैरियर बैटल ग्रुप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में खुलासा किया कि 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ समन्वित प्रिसीजन स्ट्राइक में भाग लिया, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया गया। इस संयुक्त अभियान ने तीनों सेनाओं की एकीकृत युद्धक क्षमता को नई ऊँचाई दी और भारत की रणनीतिक प्रतिरोध शक्ति को विश्व के सामने स्थापित किया।
समुद्र में तैनाती और पाकिस्तान पर दबाव
वाइस एडमिरल प्रमोद के अनुसार, भारतीय नौसेना ने अत्यंत तेज़ी से युद्धक तैयारी की स्थिति प्राप्त की। स्वदेशी अग्रिम पंक्ति के शक्तिशाली युद्धपोतों, पनडुब्बियों, विमानों और विशेष बलों से युक्त कैरियर बैटल ग्रुप तथा सरफेस एक्शन ग्रुप को उत्तरी अरब सागर में आक्रामक मुद्रा में तैनात किया गया। इस अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तान की नौसैनिक और वायु इकाइयों को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया — वे मुख्यतः बंदरगाहों तक सीमित रहीं या अपने तट के निकट ही संचालित होती रहीं।
गौरतलब है कि समुद्र में भारत की इस बढ़त ने एक विश्वसनीय प्रतिरोध क्षमता तैयार की और पाकिस्तान के आर्थिक व्यापार मार्गों तथा सामरिक जोखिमों पर दबाव बनाए रखा, जिससे तनाव नियंत्रण की रणनीति को भी महत्वपूर्ण सहायता मिली।
स्वदेशी युद्धपोतों की निर्णायक भूमिका
आईएनएस विक्रांत, कोलकाता क्लास डिस्ट्रॉयर और विशाखापटनम क्लास डिस्ट्रॉयर जैसे स्वदेशी युद्धपोतों के प्रदर्शन ने भारतीय नौसेना की ब्लू-वॉटर तैयारी और एकीकृत युद्धक क्षमता में किए गए निवेश को सही सिद्ध किया। वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा कि इसने पुनः प्रमाणित किया कि आत्मनिर्भर भारत ऑपरेशनल सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार है।
अभियान में ड्रोन, बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली, काउंटर-ड्रोन और एरियल सिस्टम्स जैसे उपकरणों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादी ठिकानों पर लंबी दूरी के प्रिसीजन हथियारों से प्रहार कर भारत ने पाकिस्तान की तथाकथित 'परमाणु ब्लैकमेल' की नीति को प्रभावी रूप से चुनौती दी।
संयुक्त समन्वय और सूचना युद्धक्षेत्र
चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच निर्बाध समन्वय, नियमित बैठकों और संयुक्त संचालन नियंत्रण केंद्र की स्थापना ने बेहतर परिस्थितिजन्य जागरूकता, तनाव नियंत्रण और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता सुनिश्चित की। इसके अतिरिक्त भारतीय तटरक्षक बल, खुफिया एजेंसियों और समुद्री सुरक्षा संस्थाओं के साथ सहज समन्वय ने राष्ट्रीय शक्ति के व्यापक उपयोग को प्रभावी बनाया।
वाइस एडमिरल प्रमोद ने यह भी रेखांकित किया कि सूचना क्षेत्र इस अभियान में एक समानांतर युद्धक्षेत्र बनकर उभरा, जहाँ दुष्प्रचार का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया गया। समग्र सरकारी दृष्टिकोण ने यह सुनिश्चित किया कि भारत की रणनीतिक मंशा ही प्रमुख विचार के रूप में स्थापित रहे।
भविष्य की रणनीति और चेतावनी
वाइस एडमिरल प्रमोद ने स्पष्ट किया कि हाल के संघर्षों में मानव रहित और स्वायत्त प्रणालियों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इन क्षमताओं को सैन्य संरचना में और तेज़ी से शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा,