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ओरछा का अनोखा 'सावन भादो' स्तंभ: इंद्र देव की आस्था का प्रतीक

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ओरछा का अनोखा 'सावन भादो' स्तंभ: इंद्र देव की आस्था का प्रतीक

सारांश

ओरछा का 'सावन भादो' स्तंभ, बुंदेला राजवंश की अद्भुत वास्तुकला का प्रतीक है। यह खंभा न केवल ठंडक प्रदान करता है, बल्कि इंद्र देव की आराधना का भी स्थान है। जानिए इसकी खासियत और स्थानीय मान्यताओं के बारे में।

मुख्य बातें

ओरछा का सावन भादो खंभा अद्वितीय वास्तुकला का प्रतीक है।
यह खंभा इंद्र देव की आस्था से जुड़ा हुआ है।
गर्मी में यह प्राकृतिक ठंडक प्रदान करता है।
स्थानीय मान्यताएं इसे पूजा का स्थान मानती हैं।
यह खंभा पर्यटकों को आकर्षित करता है।

ओरछा, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विभिन्न भागों में वास्तुकला के अद्भुत नमूने देखने को मिलते हैं। इस संदर्भ में मध्य प्रदेश स्थित ओरछा का शांत और भव्य वातावरण, जहां किले, मंदिर और कुछ खंभे खड़े हैं, बेहद विशेष है। ये न केवल दृश्यता को बढ़ाते हैं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का एक अनूठा चमत्कार भी प्रस्तुत करते हैं। यह क्षेत्र इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहाँ का अद्भुत ‘सावन भादो खंभा’ या ‘सावन भादो स्तंभ’ बुंदेला राजवंश की कलात्मकता, बुद्धिमत्ता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का जीवंत उदाहरण है।

ओरछा बुंदेला राजवंश की राजधानी रही है। यहाँ के हर स्मारक में उस समय की शान, कला और इंजीनियरिंग की गवाही मिलती है। ये खंभे केवल सजावट के लिए नहीं बनाए गए थे। इनकी विशेष डिजाइन इस प्रकार की है कि सावन और भादो (जुलाई-सितंबर) के बारिश के महीनों में इनसे पानी की धारा बहती है। इससे पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक ठंडक का अनुभव होता है। गर्मियों में ये खंभे किले को ठंडा रखने के लिए एक प्राचीन ‘नेचुरल कूलिंग सिस्टम’ के रूप में कार्य करते थे।

ये खंभे लाल पत्थर से बने हैं और इनमें बारीक नक्काशी और खूबसूरत डिज़ाइन हैं। बुंदेला शासकों की कलात्मक प्रतिभा इन खंभों में स्पष्ट दिखाई देती है। हर खंभा मजबूत और भव्य है। इन पर बनी जालियां, फूल-पत्तियों की नक्काशी और पानी की नालियां देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सूखे के दिनों में बुंदेला राजा इन खंभों के निकट विशेष पूजा करते थे। वे बारिश के देवता भगवान इंद्र की आराधना करते थे, ताकि अच्छी बारिश हो सके और धरती पर खुशहाली आए। इसी कारण इन खंभों को इंद्र देव से जोड़ा जाता है।

मॉनसून के दौरान बारिश का पानी इन खंभों की ऊपरी नालियों से नीचे की ओर बहता था। यह पानी न केवल ठंडक उत्पन्न करता था बल्कि चारों ओर एक सुंदर दृश्य भी बनाता था। पानी की धारा, ठंडी हवा और सूरज की रोशनी में चमकती नक्काशी मिलकर एक जादुई वातावरण का निर्माण करती हैं। ये खंभे ओरछा किले के भीतर स्थित हैं और किले के महल, मंदिर और अन्य इमारतों के बीच खड़े होकर पूरे परिसर को और भी भव्य बनाते हैं।

ओरछा का यह सावन-भादो खंभा बुंदेला राजवंश की बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। जब गर्मी अपने चरम पर होती थी, तब ये खंभे राजपरिवार और आम लोगों के लिए प्राकृतिक एयर कंडीशनर का काम करते थे। आज भी ये खंभे हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लोग इनकी नक्काशी देखते हैं, पानी की नालियों को छूते हैं और बुंदेला काल की कल्पना में खो जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है, जो इसे एक विशेष स्थान प्रदान करता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सावन भादो खंभा किस राज्य में है?
सावन भादो खंभा मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है।
इस खंभे का निर्माण कब हुआ था?
यह खंभा बुंदेला राजवंश के समय में बनाया गया था।
सावन भादो खंभा का क्या महत्व है?
यह खंभा इंद्र देव की आराधना से जुड़ा हुआ है और प्राकृतिक ठंडक प्रदान करता है।
क्या यह खंभा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है?
हाँ, यह खंभा हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
इस खंभे की विशेषता क्या है?
इसकी खास डिजाइन में बारिश के पानी की नालियां हैं, जो ठंडक पैदा करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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