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क्या पापांकुशा एकादशी की पूजा से सभी पाप नष्ट होते हैं और बैकुंठ के द्वार खुलते हैं?

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क्या पापांकुशा एकादशी की पूजा से सभी पाप नष्ट होते हैं और बैकुंठ के द्वार खुलते हैं?

सारांश

आश्विन मास की पापांकुशा एकादशी के दिन विधि-विधान से व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं। जानें इस पर्व का महत्व और इसे मनाने की विधि।

मुख्य बातें

पापांकुशा एकादशी का व्रत सभी पापों से मुक्ति दिलाता है।
भगवान विष्णु की पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
फलाहार या निर्जल व्रत रखना महत्वपूर्ण है।
भगवान का भजन-कीर्तन मन को शांति प्रदान करता है।

नई दिल्ली, २ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पापांकुशा एकादशी शुक्रवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

विष्णु पुराण के अनुसार, विंध्याचल पर्वत पर एक निर्दयी और हिंसक बहेलिया नामक क्रोधन रहता था। उसका जीवन हिंसा, लूटपाट और बुरी संगत में व्यतीत होता था।

जब उसके पापों का घड़ा भर गया, तब यमराज ने अपने दूत को उसे लेने भेजा। दूत ने उसे एक दिन का समय दिया। मृत्यु का समाचार सुनकर क्रोधन भयभीत हो गया। वह महर्षि अंगिरा की शरण में गया और उनसे पापमुक्ति का उपाय पूछा। महर्षि ने उसे आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने की सलाह दी।

क्रोधन ने विधिपूर्वक भगवान विष्णु का व्रत किया और उसे अपने सभी पापों से मुक्ति मिली।

महर्षि के निर्देशानुसार इस एकादशी का व्रत रखने पर भगवान की कृपा से उसके सभी पाप नष्ट हो गए। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे यमलोक ले जाने आए, तो वे चकित रह गए, क्योंकि पापांकुशा एकादशी के प्रभाव से क्रोधन के सभी पाप मिट चुके थे। यमदूत खाली हाथ लौट गए, और क्रोधन को बैकुंठ लोक में स्थान मिला।

पापांकुशा एकादशी के दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, ऋतुफल, पंचामृत, तुलसी पत्र और पीले वस्त्र अर्पित करें। 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। इस दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखें और रात में भगवान के भजन-कीर्तन करें। मन को शांत और पवित्र रखना अत्यावश्यक है।

इस पावन दिन पर गाय, भूमि, जल, अन्न, सोना, तिल, छाता और जूते आदि का दान करना शुभ माना जाता है। दीन-दुखियों को भोजन कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि व्रत न रख सकें, तो इस दिन चावल का सेवन न करें।

पापांकुशा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह पर्व न केवल पापों से छुटकारा दिलाता है, बल्कि भक्तों को आध्यात्मिक शांति और समृद्धि भी प्रदान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह व्यक्तियों को आत्मिक शांति और समृद्धि की ओर ले जाने का साधन भी है। इस दिन की पूजा से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि समाज में दान और सेवा की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पापांकुशा एकादशी का महत्व क्या है?
पापांकुशा एकादशी का महत्व इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने में है, जिससे सभी पाप समाप्त होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस दिन क्या करना चाहिए?
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, पूजा स्थल को स्वच्छ करें, और भगवान विष्णु की पूजा करें।
क्या दान करना शुभ है?
इस दिन गाय, अन्न, जल, और अन्य वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या व्रत न रख सकें तो क्या करें?
यदि व्रत न रख सकें, तो इस दिन चावल का सेवन न करें।
पापांकुशा एकादशी का व्रत कैसे करें?
पापांकुशा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने के लिए पीले कपड़े में भगवान विष्णु की पूजा करें और मंत्र का जाप करें।
राष्ट्र प्रेस
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