क्या पवन खेड़ा ने भाजपा को सलाह दी कि 'राजा को संत के आगे नतमस्तक होना चाहिए'?

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क्या पवन खेड़ा ने भाजपा को सलाह दी कि 'राजा को संत के आगे नतमस्तक होना चाहिए'?

सारांश

पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने संतों के सम्मान की अनदेखी और राजनीतिक खेलों का खुलासा किया है। क्या यह सरकार की असली तस्वीर है?

Key Takeaways

  • केंद्र सरकार पर कुव्यवस्था का आरोप
  • संतों के प्रति अनादर की बातें
  • राजनीतिक खेल का खुलासा
  • महाकुंभ में भेदभाव की स्थिति
  • कांग्रेस का धर्म की राजनीति से इंकार

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के एआईसीसी मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कुव्यवस्था का माहौल व्याप्त है और सरकार धर्म के नाम पर राजनीतिक खेल खेल रही है, जबकि आम लोगों और संतों का सम्मान नहीं किया जा रहा है।

पवन खेड़ा ने माघ मेले और महाकुंभ में शाही स्नान को लेकर उठे विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक प्राचीन और अखंड परंपरा है, जिसे न तो अंग्रेजों ने रोका और न ही मुगलों ने। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने इस परंपरा में रुकावट डाली और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को शाही स्नान करने से वंचित किया।

खेड़ा ने प्रश्न उठाया कि एक तरफ मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा और 50 गाड़ियों का काफिला दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य को उनकी पालकी के साथ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। पवन खेड़ा ने कहा, "क्या मोहन भागवत शंकराचार्य से ऊँचे हो गए हैं? उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दी जा रही है?"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाकुंभ के दौरान अमीर एवं प्रभावशाली लोगों के लिए अलग प्रबंध किए गए, जबकि आम श्रद्धालुओं और संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की आस्था अब व्यापार में बदल गई है और धर्म के पीछे छिपकर केवल धन और सत्ता की राजनीति की जा रही है। शंकराचार्य के शिष्यों के साथ बुरा व्यवहार किया गया, उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया, जो कि अत्यंत दुखद है।

खेड़ा ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस धर्म की राजनीति नहीं करती और न ही इसे सहन करेगी। पवन खेड़ा ने ओडिशा और राजस्थान के मामलों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि ओडिशा में एक पुलिस स्टेशन के बाहर भाजपा समर्थक हनुमान चालीसा पढ़ते हुए उस व्यक्ति की रिहाई की मांग कर रहे थे, जिसने एक मुसलमान की हत्या की थी। वहीं, उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके दोनों बच्चों को नौकरी दिलवाई, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला।

खेड़ा ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा, "ये न काम के हैं, न राम के। ये केवल सत्ता और धन के लिए हैं। यही इनका असली चेहरा है, जिसे देश के सामने लाना आवश्यक है।"

उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनशन का भी जिक्र किया और कहा कि इस घटना के बाद संत अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं हो रहा। सरकार ने शंकराचार्य के खिलाफ पूरी ट्रोल आर्मी लगा दी है, क्योंकि वे सरकार के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं हैं। राजा को संत के आगे झुकना चाहिए, न कि संत को राजा के सामने। यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार को ‘सनातनी नहीं, धनातनी’ कहा जाएगा।

Point of View

बल्कि समाज में संतों और आम जनता के बीच सम्मान का भी है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

पवन खेड़ा ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
पवन खेड़ा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और संतों का सम्मान नहीं कर रहे हैं।
महाकुंभ के दौरान क्या हुआ?
महाकुंभ के दौरान अमीर लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की गई, जबकि आम श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
क्या पवन खेड़ा ने संतों की सुरक्षा को लेकर कुछ कहा?
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को शाही स्नान से रोका गया और मोहन भागवत को अत्यधिक सुरक्षा प्रदान की गई।
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