क्या 'बागुरुम्बा दोहो' हमारी महान बोडो परंपरा का सम्मान करने का माध्यम है? कांग्रेस ने कभी असम को अपना नहीं माना: प्रधानमंत्री मोदी
सारांश
Key Takeaways
- बागुरुम्बा दोहो असम की बोडो संस्कृति का एक प्रतीक है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की।
- असम के विकास में बोडोलैंड और यहाँ के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- असम की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने असम की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने की बात की।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के दो दिवसीय दौरे पर पंहुचे, जहाँ एयरपोर्ट पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनका स्वागत किया। इस दौरे को असम के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि गुवाहाटी हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हुई।
सीएमओ असम ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से स्वागत किया। 'बागुरुम्बा दोहो' के भव्य सांस्कृतिक उत्सव से लेकर काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और उन्नत रेल संपर्क जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं तक, यह दौरा असम के विकास का एक निर्णायक कदम है।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोड शो में शामिल हुए और फिर वह 'बागुरुम्बा दोहो' के भव्य सांस्कृतिक उत्सव में गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में कहा कि भाजपा सरकार असम की हर विरासत और गौरव का सम्मान करना अपना सौभाग्य समझती है। आज ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि है, मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
उन्होंने कहा कि 'बागुरुम्बा दोहो' केवल एक उत्सव नहीं है। यह हमारे महान बोडो परंपरा का सम्मान करने का एक माध्यम है। यह बोडो समाज की महान विभूतियों को याद करने का एक साधन है। मेरी हमेशा से यह इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को एक बड़ा मंच मिले। भव्य आयोजनों के माध्यम से इसकी पहचान देश और दुनिया में बने। इसके लिए पहले भी प्रयास होते रहे हैं। बड़े स्तर पर बिहू से जुड़े आयोजन हों। असम की कला और संस्कृति में जो अद्भुत आनंद है, उसे प्राप्त करने का मैं कोई भी मौका नहीं छोड़ता।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मैं यह सोचकर भावुक हो रहा हूं कि मेरा असम कितना आगे बढ़ रहा है। पहले जहां रक्तपात होता था, आज वही संस्कृति के अद्भुत रंगों से सज रहा है। पहले जहां गोलियों की आवाज थी, आज वहां खाम और सिफुंग की मधुर ध्वनि है। पहले जहां कर्फ्यू का सन्नाटा था, आज वहां संगीत के सुर गूंज रहे हैं। यह उपलब्धि सिर्फ असम की नहीं, बल्कि पूरे भारत की है। असम के इस बदलाव पर हर देशवासी को गर्व है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हम असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान करते हैं, तो कुछ लोगों को परेशानी होती है। असम का सम्मान किस पार्टी के लोगों को अच्छा नहीं लगता—कांग्रेस पार्टी। वह कौन सी पार्टी है जिसने भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का विरोध किया—कांग्रेस पार्टी। असम में सेमीकंडक्टर यूनिट का विरोध किस पार्टी ने किया—कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के मंत्री ने।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए असम में अस्थिरता पैदा की और असम को हिंसा की आग में धकेला। आजादी के बाद असम के सामने बड़ी चुनौतियां थीं, लेकिन कांग्रेस ने उन समस्याओं का हल ढूंढने की बजाय राजनीतिक लाभ उठाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम के लोगों को अपना नहीं मानती है। कांग्रेस के लोग विदेशी घुसपैठियों को अधिक पसंद करते हैं क्योंकि वे यहां आकर कांग्रेस के कट्टर वोट बैंक बन जाते हैं।
इसलिए कांग्रेस के राज में विदेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ती रही और असम की लाखों बीघा जमीन पर कब्जा किया जाता रहा।
उन्होंने कहा कि असम का आत्मविश्वास, असम का सामर्थ्य और असम की प्रगति देश की विकास कहानी को नई ऊर्जा दे रहे हैं। आज असम तेजी से आगे बढ़ते राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। असम की अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ रही है। इस विकास में बोडोलैंड और यहाँ के लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।