20 अक्टूबर 2026
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पुलिस स्मृति दिवस 21 अक्टूबर: लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 1959 की शहादत का इतिहास

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पुलिस स्मृति दिवस 21 अक्टूबर: लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 1959 की शहादत का इतिहास

सारांश

21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी हमले में शहीद हुए दस पुलिसकर्मियों की याद में हर साल पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1962 के युद्ध से पहले सीमा पर हुई पहली शहादत का स्मरण है।

मुख्य बातें

पुलिस स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है।
21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद और 7 घायल हुए थे।
शहीद दल का नेतृत्व डीसीआईओ करम सिंह कर रहे थे।
13 नवंबर 1959 को चीनी सेना ने शहीदों के पार्थिव शरीर वापस सौंपे।
जनवरी 1960 में IGP सम्मेलन में 21 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से 'पुलिस स्मृति दिवस' घोषित किया गया।
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की 'वीरता की दीवार' पर 35,000 से अधिक शहीदों के नाम अंकित हैं।

हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस उन साहसी पुलिसकर्मियों की अमर स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। यह दिन विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 21 अक्टूबर 1959 को चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए दस पुलिसकर्मियों के बलिदान को समर्पित है। इन वीरों की शहादत भारतीय पुलिस इतिहास का एक अमिट और गौरवशाली अध्याय है।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

20 अक्टूबर 1959 को उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स से तीन टोही दल सीमावर्ती क्षेत्र की निगरानी के लिए रवाना किए गए। इनमें से पहले दो दलों के जवान उसी दिन दोपहर तक सुरक्षित वापस आ गए, किंतु दो पुलिस कांस्टेबल और एक पोर्टर वाला तीसरा दल लौट नहीं सका। लापता जवानों की तलाश के लिए अगली सुबह — 21 अक्टूबर 1959 को — डीसीआईओ करम सिंह के नेतृत्व में सभी उपलब्ध जवानों को खोज अभियान पर भेजा गया।

शहादत का वह काला दिन

दोपहर के आसपास एक पहाड़ी पर चीनी सैनिक प्रकट हुए और उन्होंने करम सिंह के नेतृत्व वाले दल पर अचानक गोलियाँ चलाईं और ग्रेनेड फेंके। इस अप्रत्याशित हमले में दस बहादुर पुलिसकर्मी शहीद हो गए और सात अन्य घायल हो गए। चीनी सेना ने सात घायल पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया, जबकि शेष जवान किसी तरह वहाँ से निकल पाने में सफल रहे।

घटना के करीब तीन सप्ताह बाद, 13 नवंबर 1959 को चीनी सेना ने शहीद दस पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वापस सौंपे। हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ शहीदों का अंतिम संस्कार किया गया।

स्मृति दिवस की स्थापना

जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों (IGP) के वार्षिक सम्मेलन में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि अब से प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। इसके साथ ही हॉट स्प्रिंग्स में एक स्मारक बनाने का भी संकल्प लिया गया। आज भी हर साल देश भर के पुलिस जवान इन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हॉट स्प्रिंग्स जाते हैं।

आयोजन और परंपराएँ

इस अवसर पर देशभर के हर जिले के पुलिस मुख्यालय में 'स्मृति दिवस परेड' आयोजित की जाती है। इस औपचारिक परेड में हथियारों को उल्टा (शोक शस्त्र) रखा जाता है और दिवंगत आत्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया जाता है। राज्यों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीद पुलिसकर्मियों के नाम पढ़कर सुनाए जाते हैं, ताकि उनके सर्वोच्च बलिदान को गर्व के साथ स्मरण किया जा सके। शहीदों के सम्मान में तीन बार गोलियाँ भी चलाई जाती हैं।

राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और वीरता की दीवार

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थापित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक कर्तव्यपालन में अनगिनत पुलिसकर्मियों के अतुलनीय बलिदान का जीवंत प्रमाण है। यह स्मारक पुलिस बलों को राष्ट्रीय पहचान, गौरव, उद्देश्य की एकता और साझा इतिहास का बोध कराता है।

स्मारक पर स्थापित 'वीरता की दीवार' पर 30 फीट ऊँची ग्रेनाइट की प्रतिमा है, जिस पर कर्तव्य निभाते हुए प्राण न्यौछावर करने वाले 35,000 से अधिक शहीदों के नाम अंकित हैं — यह दीवार उनकी वीरता और अदम्य साहस की सदा-स्मरणीय गवाह है। यह स्मारक न केवल अतीत का स्मरण कराता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कर्तव्यनिष्ठा और देश-प्रेम की प्रेरणा का स्रोत भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस ऐतिहासिक सत्य की याद दिलाता है कि भारत-चीन सीमा विवाद का पहला रक्त 1959 में पुलिस के जवानों ने बहाया था — सेना ने नहीं। गौरतलब है कि यह घटना 1962 के युद्ध से भी पहले की है, और इसीलिए लद्दाख सीमा पर चीन के इरादों की पहली चेतावनी भी पुलिस की शहादत से ही मिली थी। चाणक्यपुरी का राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और 35,000 से अधिक नामों वाली 'वीरता की दीवार' बताती है कि कर्तव्यपालन में बलिदान का यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है। यह दिन इस बात की भी याद दिलाता है कि सीमा सुरक्षा की कहानी में पुलिस के योगदान को राष्ट्रीय स्मृति में उचित स्थान मिलना अभी भी बाकी है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुलिस स्मृति दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए दस पुलिसकर्मियों की याद को समर्पित है।
1959 में हॉट स्प्रिंग्स में क्या हुआ था?
21 अक्टूबर 1959 को डीसीआईओ करम सिंह के नेतृत्व में एक खोज दल लापता जवानों की तलाश में गया था। दोपहर के आसपास चीनी सैनिकों ने इस दल पर गोलियाँ चलाईं और ग्रेनेड फेंके, जिसमें दस पुलिसकर्मी शहीद हो गए, सात घायल हुए और सात को बंदी बना लिया गया।
21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस कब से मनाया जाने लगा?
जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। तभी से यह परंपरा अनवरत चली आ रही है।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक कहाँ स्थित है और इसकी क्या विशेषता है?
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित है। इस पर बनी 'वीरता की दीवार' 30 फीट ऊँची ग्रेनाइट की प्रतिमा है, जिस पर कर्तव्यपालन में शहीद हुए 35,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के नाम अंकित हैं।
पुलिस स्मृति दिवस पर किस तरह के कार्यक्रम आयोजित होते हैं?
इस दिन देशभर के हर जिले के पुलिस मुख्यालय में 'स्मृति दिवस परेड' होती है। परेड में हथियार उल्टे (शोक शस्त्र) रखे जाते हैं, दो मिनट का मौन रखा जाता है, शहीदों के नाम पढ़े जाते हैं और उनके सम्मान में तीन बार गोलियाँ चलाई जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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