पुलिस स्मृति दिवस 21 अक्टूबर: लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 1959 की शहादत का इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस उन साहसी पुलिसकर्मियों की अमर स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। यह दिन विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में 21 अक्टूबर 1959 को चीनी सैनिकों के हमले में शहीद हुए दस पुलिसकर्मियों के बलिदान को समर्पित है। इन वीरों की शहादत भारतीय पुलिस इतिहास का एक अमिट और गौरवशाली अध्याय है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
20 अक्टूबर 1959 को उत्तर-पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स से तीन टोही दल सीमावर्ती क्षेत्र की निगरानी के लिए रवाना किए गए। इनमें से पहले दो दलों के जवान उसी दिन दोपहर तक सुरक्षित वापस आ गए, किंतु दो पुलिस कांस्टेबल और एक पोर्टर वाला तीसरा दल लौट नहीं सका। लापता जवानों की तलाश के लिए अगली सुबह — 21 अक्टूबर 1959 को — डीसीआईओ करम सिंह के नेतृत्व में सभी उपलब्ध जवानों को खोज अभियान पर भेजा गया।
शहादत का वह काला दिन
दोपहर के आसपास एक पहाड़ी पर चीनी सैनिक प्रकट हुए और उन्होंने करम सिंह के नेतृत्व वाले दल पर अचानक गोलियाँ चलाईं और ग्रेनेड फेंके। इस अप्रत्याशित हमले में दस बहादुर पुलिसकर्मी शहीद हो गए और सात अन्य घायल हो गए। चीनी सेना ने सात घायल पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया, जबकि शेष जवान किसी तरह वहाँ से निकल पाने में सफल रहे।
घटना के करीब तीन सप्ताह बाद, 13 नवंबर 1959 को चीनी सेना ने शहीद दस पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर वापस सौंपे। हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ शहीदों का अंतिम संस्कार किया गया।
स्मृति दिवस की स्थापना
जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों (IGP) के वार्षिक सम्मेलन में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि अब से प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। इसके साथ ही हॉट स्प्रिंग्स में एक स्मारक बनाने का भी संकल्प लिया गया। आज भी हर साल देश भर के पुलिस जवान इन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हॉट स्प्रिंग्स जाते हैं।
आयोजन और परंपराएँ
इस अवसर पर देशभर के हर जिले के पुलिस मुख्यालय में 'स्मृति दिवस परेड' आयोजित की जाती है। इस औपचारिक परेड में हथियारों को उल्टा (शोक शस्त्र) रखा जाता है और दिवंगत आत्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया जाता है। राज्यों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीद पुलिसकर्मियों के नाम पढ़कर सुनाए जाते हैं, ताकि उनके सर्वोच्च बलिदान को गर्व के साथ स्मरण किया जा सके। शहीदों के सम्मान में तीन बार गोलियाँ भी चलाई जाती हैं।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और वीरता की दीवार
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थापित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक कर्तव्यपालन में अनगिनत पुलिसकर्मियों के अतुलनीय बलिदान का जीवंत प्रमाण है। यह स्मारक पुलिस बलों को राष्ट्रीय पहचान, गौरव, उद्देश्य की एकता और साझा इतिहास का बोध कराता है।
स्मारक पर स्थापित 'वीरता की दीवार' पर 30 फीट ऊँची ग्रेनाइट की प्रतिमा है, जिस पर कर्तव्य निभाते हुए प्राण न्यौछावर करने वाले 35,000 से अधिक शहीदों के नाम अंकित हैं — यह दीवार उनकी वीरता और अदम्य साहस की सदा-स्मरणीय गवाह है। यह स्मारक न केवल अतीत का स्मरण कराता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कर्तव्यनिष्ठा और देश-प्रेम की प्रेरणा का स्रोत भी है।