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'प्रहार' समीक्षा: राजकुमार राव का संयमित अभिनय, 26/11 के बाद कोर्टरूम की अनकही लड़ाई

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'प्रहार' समीक्षा: राजकुमार राव का संयमित अभिनय, 26/11 के बाद कोर्टरूम की अनकही लड़ाई

सारांश

'प्रहार' सिर्फ 26/11 की त्रासदी की याद नहीं दिलाती — यह उसके बाद की अनकही अदालती लड़ाई दिखाती है। राजकुमार राव के संयमित अभिनय और अविनाश अरुण के भरोसेमंद निर्देशन से बनी यह फिल्म साबित करती है कि न्याय की राह लंबी, खामोश और कैमरों से दूर होती है।

मुख्य बातें

राजकुमार राव ने सार्वजनिक अभियोजक उज्ज्वल निकम का किरदार संयम और दृढ़ता के साथ निभाया है।
फिल्म अजमल कसाब के मुकदमे और 1993 के मुंबई बम धमाकों की कानूनी कार्यवाही को केंद्र में रखती है।
ललित प्रभाकर (कसाब), जयदीप अहलावत , सिकंदर खेर , वामिका गब्बी और आशीष विद्यार्थी ने सहायक भूमिकाओं में गहराई जोड़ी।
निर्देशक अविनाश अरुण ने भावनाओं को जबरदस्ती थोपने के बजाय कहानी को उसके स्वाभाविक तनाव से बढ़ने दिया।
मैडॉक फिल्म्स और निर्माता दिनेश विजान की यह 140 मिनट की फिल्म 4.5 रेटिंग के साथ एक उल्लेखनीय कोर्टरूम ड्रामा है।

राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और यह 26/11 मुंबई हमलों के बाद की कानूनी लड़ाई को केंद्र में रखकर बनाई गई एक असाधारण कोर्टरूम ड्रामा है। निर्देशक अविनाश अरुण ने सार्वजनिक अभियोजक उज्ज्वल निकम की संघर्षगाथा को संवेदनशीलता और संयम के साथ पर्दे पर उतारा है, जो त्रासदी के बाद न्याय सुनिश्चित करने की कठिन प्रक्रिया को बेबाकी से दिखाती है। 140 मिनट की यह फिल्म दर्शकों को याद दिलाती है कि सुर्खियाँ जहाँ खत्म होती हैं, असली लड़ाई वहीं से शुरू होती है।

कहानी का केंद्रबिंदु

फिल्म अजमल कसाब के मुकदमे की कानूनी कार्यवाही और साथ ही 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले को भी छूती है। कहानी केवल अदालती बहसों तक सीमित नहीं रहती — यह उस व्यक्ति के व्यक्तिगत त्याग को भी उजागर करती है, जिसकी पेशेवर प्रतिबद्धताओं ने उसके पारिवारिक जीवन को लगातार पृष्ठभूमि में धकेला। फिल्म से जुड़ी पंक्ति — 'जल्दबाजी में मिला न्याय, न्याय को दफन करने जैसा है' — पूरी फिल्म के सार को एक वाक्य में बयान कर देती है। यह कहानी धैर्य, दृढ़ विश्वास और कानून में अटूट आस्था की माँग करती है।

राजकुमार राव: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका में असाधारण संयम का परिचय दिया है। उनका अभिनय चीख-पुकार और नाटकीयता से परे है — हर हाव-भाव, हर संवाद और अदालत में उनकी दृढ़ उपस्थिति सधी हुई है। कसाब से जुड़े अंतिम तर्कों के दृश्यों में वह विशेष रूप से प्रभावशाली हैं और निकम के दृढ़ विश्वास को बिना किसी बनावटीपन के जीवंत करते हैं। निकम के अभियोजक और एक पिता के रूप के बीच का अंतर उनके अभिनय का सबसे मार्मिक पहलू बनकर सामने आता है।

सहायक कलाकारों का योगदान

ललित प्रभाकर ने अजमल कसाब के किरदार में एक बेचैन करने वाली उपस्थिति दर्ज की है। फिल्म के अंत की ओर उनका इकबालिया बयान दृश्य समाप्त होने के बाद भी मन में गूँजता रहता है। सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील के रूप में गंभीरता और संयम का संतुलन बनाए रखते हैं, जबकि जयदीप अहलावत पाकिस्तानी सरकारी अभियोजक के बहुआयामी किरदार को कई परतों के साथ प्रस्तुत करते हैं। वामिका गब्बी ज्योति निकम के रूप में भावनात्मक गर्माहट लाती हैं और उस परिवार की प्रतिनिधि बनती हैं जो निकम की व्यस्त पेशेवर जिंदगी के परिणामों के साथ जीता है। आशीष विद्यार्थी न्यायमूर्ति एम. एल. तहिलियानी के किरदार में अदालती कार्यवाही को आवश्यक गंभीरता प्रदान करते हैं।

निर्देशन, लेखन और बैकग्राउंड स्कोर

निर्देशक अविनाश अरुण का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह भावनाओं को जबरदस्ती नहीं थोपते — वह कानूनी कार्यवाही को अपना स्वाभाविक तनाव स्वयं उत्पन्न करने देते हैं। फिल्म की पटकथा प्रभावशाली है और संवाद बिना भाषण बने अपना वजन रखते हैं। बैकग्राउंड स्कोर महत्वपूर्ण बहसों में तनाव को रेखांकित करता है और भावनात्मक दृश्यों को जरूरी प्रभाव देता है, लेकिन कलाकारों के अभिनय पर कभी हावी नहीं होता।

निर्माण और संदेश

दिनेश विजान के निर्माण में मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी 'प्रहार' इस प्रोडक्शन हाउस की विविध शैलियों की परंपरा को आगे बढ़ाती है — 'बदलापुर' के अंधेरे से लेकर 'मिमी' और 'स्त्री' की हॉरर-कॉमेडी दुनिया तक। यह फिल्म उस ऐतिहासिक सत्य की याद दिलाती है कि न्याय रातोंरात नहीं मिलता और उसे हासिल करने के लिए जो त्याग करने पड़ते हैं, वे अक्सर कैमरों की नज़रों से दूर रह जाते हैं। कुल मिलाकर, 4.5 रेटिंग के साथ 'प्रहार' अपने अभिनय, भावनात्मक गहराई और न्याय की लंबी राह को ईमानदारी से दिखाने के लिए अवश्य देखी जाने वाली फिल्म है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही इस फिल्म को भीड़ से अलग करता है। हालाँकि फिल्म उज्ज्वल निकम के दृष्टिकोण से ही कहानी कहती है, इसलिए दर्शकों को अभियोजन पक्ष की व्याख्या को एकमात्र सत्य के रूप में नहीं लेना चाहिए। राजकुमार राव का संयमित अभिनय यह भी रेखांकित करता है कि बायोपिक शैली में मुख्य पात्र को नायक बनाने की प्रवृत्ति के बावजूद, जटिल किरदारों को उनकी खामियों सहित पर्दे पर जीवंत किया जा सकता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रहार' फिल्म किस पर आधारित है?
'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' 26/11 मुंबई हमलों के बाद अजमल कसाब के मुकदमे और 1993 के मुंबई बम धमाकों की कानूनी कार्यवाही पर आधारित है। यह फिल्म सार्वजनिक अभियोजक उज्ज्वल निकम की न्यायिक लड़ाई और उनके निजी जीवन के त्याग को भी दर्शाती है।
'प्रहार' में राजकुमार राव का अभिनय कैसा है?
राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की भूमिका में असाधारण संयम और दृढ़ता का परिचय दिया है। उनका अभिनय नाटकीयता से परे है — संवाद अदायगी, हाव-भाव और अदालत में उनकी मजबूत उपस्थिति सब कुछ सधा हुआ है।
फिल्म में और कौन-कौन से कलाकार हैं?
फिल्म में ललित प्रभाकर (अजमल कसाब), जयदीप अहलावत (पाकिस्तानी सरकारी अभियोजक), सिकंदर खेर (बचाव पक्ष के वकील), वामिका गब्बी (ज्योति निकम) और आशीष विद्यार्थी (न्यायमूर्ति एम. एल. तहिलियानी) प्रमुख भूमिकाओं में हैं। सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों में गहराई जोड़ी है।
'प्रहार' की रेटिंग और अवधि क्या है?
फिल्म को 4.5 की रेटिंग दी गई है और इसकी अवधि 140 मिनट है। यह मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले निर्माता दिनेश विजान ने बनाई है।
फिल्म का निर्देशन और लेखन कैसा है?
निर्देशक अविनाश अरुण ने भावनाओं को जबरदस्ती थोपने के बजाय कानूनी कार्यवाही को उसका स्वाभाविक तनाव खुद उत्पन्न करने दिया है। फिल्म की पटकथा प्रभावशाली है और बैकग्राउंड स्कोर कलाकारों के अभिनय पर कभी हावी नहीं होता।
राष्ट्र प्रेस
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