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क्या भारत-ईयू एफटीए पर प्रियंका चतुर्वेदी का समर्थन और ट्रंप पर तंज है महत्वपूर्ण?

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क्या भारत-ईयू एफटीए पर प्रियंका चतुर्वेदी का समर्थन और ट्रंप पर तंज है महत्वपूर्ण?

सारांश

प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-ईयू एफटीए समझौते का स्वागत किया है, जिसे लंबे समय से प्रतीक्षित माना जा रहा था। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप पर करारा तंज भी कसा। इस समझौते के महत्व और ट्रंप की नीतियों का असर समझते हुए, यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक वक्तव्य है।

मुख्य बातें

भारत-ईयू एफटीए को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे 'विन-विन' करार दिया है।
यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगा।
भारत से कई उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा।
ट्रंप की नीतियों का इस समझौते पर गहरा असर है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से चर्चा में रहे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिए जाने पर राजनीतिक क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस डील का जोरदार स्वागत किया है और इसे दोनों पक्षों के लिए 'विन-विन' करार दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्यंग्य करते हुए इस समझौते को 'उत्प्रेरक'

प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ईयू-इंडिया एफटीए डील का स्वागत है, जो दो दशकों की बातचीत और हिचकिचाहट के बाद हुई है। लंबे समय से जिस पल का इंतजार था, वह आखिरकार दोनों के लिए एक विन-विन डील में बदल गया है।"

उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसते हुए लिखा, "हिचकिचाहट को दूर करने में उत्प्रेरक बनने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बहुत-बहुत धन्यवाद! मुझे उम्मीद है कि लोकतंत्र, साझा समृद्धि, नियमों पर आधारित व्यवस्था और ग्लोबल ट्रेड के मूल्यों में विश्वास रखने वाले ये दोनों क्षेत्र, हम जिस कठिन समय में रह रहे हैं, उसमें एक-दूसरे को सशक्त बनाते रहेंगे!"

यह पोस्ट ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों के संदर्भ में आई है। ट्रंप ने पिछले साल रूस से तेल खरीद और ब्रिक्स में भागीदारी का हवाला देते हुए भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए थे। हाल ही में उन्होंने यूरोपीय देशों पर भी टैरिफ की धमकी दी, खासकर ग्रीनलैंड अधिग्रहण के मुद्दे पर। ऐसे में भारत-ईयू एफटीए को ट्रंप की नीतियों के 'प्रतिक्रियात्मक' परिणाम के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक व्यापार में अमेरिका-केंद्रित निर्भरता कम करने की दिशा में एक कदम है।

यह समझौता, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है, लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद 27 जनवरी 2026 को भारत-ईयू समिट में अंतिम रूप लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईयू नेताओं उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में घोषित यह डील वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है। समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापार में भारी वृद्धि की उम्मीद है। भारत से टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, मरीन प्रोडक्ट्स आदि को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि ईयू के ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल गुड्स, वाइन, चॉकलेट आदि पर टैरिफ घटेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह वैश्विक व्यापार नीति पर भी गहरा असर डालेगा। यह समझौता न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से, बल्कि राजनीतिक स्थिरता में भी योगदान करेगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए का क्या महत्व है?
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा और दोनों क्षेत्रों के आर्थिक विकास में सहायक होगा।
प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्रंप पर क्या कहा?
उन्होंने ट्रंप को इस समझौते के लिए 'उत्प्रेरक' बताया और उनके व्यापार नीतियों पर व्यंग्य किया।
राष्ट्र प्रेस
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