क्या राष्ट्रपति भवन कार्यक्रम में राहुल गांधी का पटका न पहनना देश का अपमान है?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी का पटका न पहनना विवाद का विषय बन गया है।
- प्रतुल शाह देव ने इसे देश का अपमान बताया।
- सांस्कृतिक प्रतीकों का राजनीतिक महत्व होता है।
रांची, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति भवन के आयोजन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा नॉर्थ-ईस्ट का पटका न पहनने पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि राहुल गांधी देश का अपमान कर रहे हैं।
प्रतुल शाह देव ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "राहुल गांधी की सोच अब स्पष्ट हो गई है। विदेशी डिप्लोमैट असमिया पट्टा पहनने को तैयार थे, जो नॉर्थ-ईस्ट की एक अद्भुत परंपरा है। यदि आप इसे नहीं पहनते हैं, तो आप कहीं न कहीं देश का अपमान कर रहे हैं। क्या राहुल गांधी का नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के प्रति ऐसा रवैया हो गया है? वह उस क्षेत्र के प्रतीक, गमछे को पहनने से क्यों बच रहे हैं? यह एक नफरती मानसिकता को दर्शाता है। नफरत की दुकान चलाना और उसे बेचना है।"
चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाते हुए श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के निर्णय पर प्रतुल शाह देव ने कहा, "यह श्राइन बोर्ड का फैसला है और हमें इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। आप देख सकते हैं कि मुसलमानों के भी कई स्थल हैं जहां दूसरे धर्मों के लोगों को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। इसलिए यह निर्णय किन हालात में लिया गया, और जब समिति के सदस्यों के बीच भी सहमति नहीं है, तो इंतजार करना बेहतर होगा।"
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग पहले मुसलमानों और अल्पसंख्यक मुद्दों पर लंबी-चौड़ी बातें करते थे, अब कह रहे हैं कि मुसलमानों को कभी उचित महत्व नहीं दिया गया और उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि यदि कुछ देश आप पर पाबंदियाँ लगाते रहें, तो भी आपको अपने बाजार तलाशने होंगे। भारत भी यूरोपियन यूनियन के लिए एक बहुत बड़ा बाजार है। 14वीं सदी से हमारे मसाले यूरोप को निर्यात किए जा रहे थे। अब दोनों देशों और यूरोपियन यूनियन के बीच इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से शानदार परिणाम देखने को मिलेंगे।