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राजा हिरदेशाह लोधी का संघर्ष MP के पाठ्यक्रम में होगा शामिल, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

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राजा हिरदेशाह लोधी का संघर्ष MP के पाठ्यक्रम में होगा शामिल, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने 'नर्मदा टाइगर' राजा हिरदेशाह लोधी को इतिहास में उचित स्थान देने का संकल्प लिया है — उनका संघर्ष अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगा और नर्मदा किनारे हीरापुर में उनके नाम से तीर्थ स्थल बनेगा। 1842 में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले इस योद्धा की 168वीं पुण्यतिथि पर CM मोहन यादव ने यह बड़ा ऐलान किया।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 28 अप्रैल 2026 को भोपाल के जंबूरी मैदान में राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर बड़े ऐलान किए।
राजा हिरदेशाह लोधी के संघर्ष और जीवन को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से तीर्थ स्थल का निर्माण होगा।
राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया था।
राज्य सरकार पहले ही रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय स्थापित कर चुकी है।
प्रत्येक नगरीय निकाय में गीता भवन और सभी जनपदों में वृंदावन ग्राम बनाने की योजना जारी है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 28 अप्रैल 2026 को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में ऐलान किया कि स्वतंत्रता सेनानी राजा हिरदेशाह लोधी के संघर्ष को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा और नर्मदा किनारे हीरापुर में उनके नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण भी कराया जाएगा। यह कार्यक्रम राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) के अवसर पर आयोजित किया गया था।

राजा हिरदेशाह का ऐतिहासिक संघर्ष

नर्मदा टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले राजा हिरदेशाह लोधी ने 1842 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लिया था। वे अपने भाइयों के साथ मिलकर 1858 तक अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते रहे। उन्होंने बुंदेलखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध व्यापक आंदोलन खड़ा किया था। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने 1857 की क्रांति से भी पहले, 1842 में ही आजादी का बिगुल फूंक दिया था और देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

पाठ्यक्रम और शोध की घोषणाएँ

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार राजा हिरदेशाह के संघर्ष पर विधिवत शोध कराएगी और उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को लिपिबद्ध कर शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार पहले ही रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में एक राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना कर चुकी है, क्योंकि 1857 की क्रांति में रानी अवंतीबाई का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसी क्रम में महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी एक शोध संस्थान स्थापित किया गया है।

तीर्थ स्थल और सांस्कृतिक पुनरोत्थान

सीएम यादव ने घोषणा की कि नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक भव्य तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त गीता भवन और सभी जनपदों में वृंदावन ग्राम तैयार कर रही है। साथ ही, कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों के कल्याण के लिए भी विशेष पहल की जा रही है।

लोधी समाज को संदेश

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने इस अवसर पर कहा कि लोधी समाज सामर्थ्यवान है और इस समाज के सदस्यों ने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया है। उन्होंने समाज के युवाओं से साहसी, शक्तिमान, शिक्षित और संस्कारवान बनने का आह्वान किया। यह कार्यक्रम न केवल एक ऐतिहासिक नायक को श्रद्धांजलि था, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा भी है जिसके तहत उपेक्षित स्वतंत्रता सेनानियों को मुख्यधारा के इतिहास में स्थान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

आगे की राह

शिक्षा विभाग द्वारा पाठ्यक्रम में बदलाव की प्रक्रिया और हीरापुर तीर्थ स्थल के निर्माण की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें क्षेत्रीय इतिहास को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, बशर्ते इन्हें समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। असली कसौटी यह होगी कि पाठ्यक्रम परिवर्तन की समयसीमा और तीर्थ स्थल निर्माण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध रहती है — क्योंकि ऐसी कई घोषणाएँ मंच से होती हैं, लेकिन क्रियान्वयन में वर्षों लग जाते हैं। फिर भी, उपेक्षित स्वतंत्रता सेनानियों को पाठ्यपुस्तकों में जगह देना एक सकारात्मक कदम है, जो इतिहास की अधूरी तस्वीर को पूरा करने में मदद कर सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजा हिरदेशाह लोधी कौन थे?
राजा हिरदेशाह लोधी एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हें 'नर्मदा टाइगर' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1857 की क्रांति से भी पहले, 1842 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका और 1858 तक अपने भाइयों के साथ अंग्रेजों से लड़ते रहे।
CM मोहन यादव ने राजा हिरदेशाह के लिए क्या घोषणाएँ कीं?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 28 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि राजा हिरदेशाह लोधी के संघर्ष को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा और नर्मदा किनारे हीरापुर में उनके नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा उनके जीवन पर विधिवत शोध भी कराया जाएगा।
राजा हिरदेशाह की पुण्यतिथि पर यह कार्यक्रम कहाँ आयोजित हुआ?
राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) पर यह कार्यक्रम राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित किया गया।
मध्य प्रदेश सरकार ने इससे पहले किन स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया है?
मध्य प्रदेश सरकार ने रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में एक राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की है, जो 1857 की क्रांति में उनके योगदान को मान्यता देता है। इसके अलावा महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी एक शोध संस्थान बनाया गया है।
राजा हिरदेशाह का तीर्थ स्थल कहाँ बनेगा?
राजा हिरदेशाह लोधी के नाम पर तीर्थ स्थल नर्मदा नदी के किनारे हीरापुर में बनाया जाएगा। इसकी निर्माण समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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