इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे: रजत बेदी की माता-पिता से अपील — बेटियों को चुनाव की आज़ादी दें
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रजत बेदी ने 11 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girl Child Day) के अवसर पर देशभर के माता-पिता से एक भावपूर्ण अपील की — कि वे अपनी बेटियों को वही स्वतंत्रता, शिक्षा और प्रोत्साहन दें जो वे अपने बेटों को देते हैं। मुंबई से जारी अपने इस संदेश में उन्होंने लैंगिक समानता और बालिका सशक्तीकरण पर ज़ोर दिया।
माता-पिता से रजत बेदी की खास अपील
रजत बेदी ने कहा, ''मैं कहना चाहता हूं कि एक बेटी को कभी यह साबित करने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए कि वह बेटे जितनी काबिल है। उसे भी उतनी ही आज़ादी, अच्छी शिक्षा और प्रोत्साहन दें, जितना बेटे को देते हैं। सिर्फ लड़की होने की वजह से यह फैसला न करें कि वह क्या कर सकती है और क्या नहीं।''
उन्होंने आगे जोड़ा, ''उसे गलतियाँ करने दें, उनसे सीखने दें और ज़िंदगी में अपना रास्ता खुद तलाशने का मौका दें।'' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देशभर में बालिका शिक्षा और महिला स्वायत्तता पर व्यापक बहस जारी है।
पिताओं के लिए विशेष संदेश
रजत ने विशेष रूप से पिताओं को संबोधित करते हुए कहा, ''बेटी का साथ देने का मतलब सिर्फ उसकी सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि उस पर भरोसा करना और उसे अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास देना भी है। हर लड़की को यह मौका मिलना चाहिए।''
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर वर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
महिला सशक्तीकरण पर आधारित फिल्म की चाहत
जब रजत से पूछा गया कि यदि उन्हें महिला सशक्तीकरण पर आधारित किसी फिल्म में काम करने का अवसर मिले तो वे किस कहानी का चुनाव करेंगे, तो उन्होंने कहा, ''मैं ऐसी लड़की की कहानी का हिस्सा बनना चाहूंगा, जो पढ़ना चाहती है, लेकिन उसे अपने आसपास के लोगों की सोच और विरोध का सामना करना पड़ता है। मेरा मानना है कि बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होती है।''
उन्होंने कहा कि जब किसी लड़की को पढ़ने का मौका मिलता है, तो वह अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने की अधिक संभावनाएँ देख पाती है और अपने फैसले लेने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होती है।
सामाजिक बदलाव पर जोर
रजत बेदी ने कहा, ''मैं ऐसी कहानी दिखाना चाहूंगा, जिसमें लड़की के संघर्ष के साथ-साथ उसके आसपास के लोगों की सोच में आने वाले बदलाव को भी जगह मिले। कई बार किसी एक व्यक्ति का साथ बच्चे की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।''
उन्होंने यह भी कहा, ''अगर किसी फिल्म को देखने के बाद कुछ माता-पिता भी अपनी बेटियों को लेकर अपनी सोच बदलते हैं, तो मैं उस फिल्म को सार्थक मानूंगा। बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देना, उनकी पसंद का सम्मान करना और उन्हें अपने फैसले खुद लेने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद ज़रूरी है।'' रजत बेदी का यह संदेश सिनेमा जगत से आगे बढ़कर एक व्यापक सामाजिक संवाद की शुरुआत करने की कोशिश है।