रतलाम में ट्रेन-कार टक्कर: बंजली फाटक नंबर 192 पर बड़ा हादसा टला, डीआरएम ने दिए जांच के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के सेजावता-बंजली बायपास क्षेत्र में 16 अक्टूबर 2026 की देर रात एक गंभीर रेल दुर्घटना होते-होते टल गई, जब बंजली रेलवे फाटक नंबर 192 पर ट्रैक और फाटक के बीच फंसी एक कार वलसाड-हिसार पैसेंजर ट्रेन (04728) की चपेट में आ गई। टक्कर के बावजूद कार चालक सुरक्षित बच गया और कोई जनहानि नहीं हुई। घटना की गंभीरता को देखते हुए रतलाम रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अश्वनी कुमार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई टक्कर
रात के समय बंजली रेलवे फाटक पर ट्रेन के आगमन की सूचना मिलने पर फाटक बंद किया जा रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान एक कार रेलवे ट्रैक और फाटक के बीच फंस गई। तभी जावरा की दिशा से आ रही वलसाड-हिसार पैसेंजर ट्रेन (04728) वहां पहुंच गई और ट्रैक पर खड़ी कार से उसकी टक्कर हो गई।
बताया जा रहा है कि उस समय ट्रेन की गति अपेक्षाकृत कम थी, जिसके कारण टक्कर का प्रभाव सीमित रहा और एक बड़ा हादसा टल गया। कार चालक किसी तरह सुरक्षित बच निकला।
मौके पर रेस्क्यू दल की तैनाती
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल पर एकत्रित हो गए। रेलवे का रेस्क्यू दल मौके पर पहुंचा और घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी जुटाई गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के बाद ट्रैक की जांच की गई।
गौरतलब है कि इस प्रकार की घटनाएं रेलवे फाटकों पर फाटक संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय रेलवे मानवरहित समपार फाटकों को समाप्त करने और सुरक्षित फाटक प्रबंधन की दिशा में काम कर रहा है।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही रतलाम रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हो गए। डीआरएम अश्वनी कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में कार ट्रैक पर पहुंची और फाटक संचालन में कोई चूक हुई अथवा नहीं। फिलहाल किसी की लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद रेलवे फाटकों की सुरक्षा व्यवस्था और फाटक संचालन की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि फाटक बंद करने की प्रक्रिया के दौरान वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सतर्कता बरती जानी चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में रेलवे फाटकों पर हादसों की संख्या को लेकर रेलवे बोर्ड कड़े दिशा-निर्देश लागू करने की प्रक्रिया में है।
आगे क्या होगा
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के सटीक कारणों और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए फाटक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा भी संभव बताई जा रही है।