रावी गुप्ता बोलीं — 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में दामिनी का किरदार बना सरप्राइज, टीवी में अब किरदारों में आई गहराई
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री रावी गुप्ता इन दिनों स्टार प्लस के चर्चित धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के दूसरे सीजन में दामिनी (गौतम विरानी की पत्नी) की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक बातचीत में खुलासा किया कि पिछले कुछ वर्षों में टेलीविज़न इंडस्ट्री में काम करने का तरीका और किरदारों को दिखाने का नज़रिया बुनियादी रूप से बदल चुका है।
तकनीक में ज़मीन-आसमान का फर्क
रावी गुप्ता ने कहा कि बीते कुछ सालों में इंडस्ट्री बेहद तेज़ गति से आगे बढ़ी है और यह सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा, 'इंडस्ट्री में बदलाव आगे भी जारी रहेगा, खासकर तकनीक के मामले में। अगर मैं क्योंकि सास भी कभी बहू थी के पहले सीजन की तुलना दूसरे सीजन से करूँ, तो दोनों की तकनीक में जमीन-आसमान का फर्क है।'
यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के उभार के बाद से डेली सोप की प्रोडक्शन क्वालिटी पर दबाव लगातार बढ़ा है, और निर्माताओं ने कैमरा, एडिटिंग और विजुअल इफेक्ट्स में उल्लेखनीय निवेश किया है।
दामिनी का किरदार बना सरप्राइज
रावी गुप्ता ने अपने किरदार दामिनी के बारे में बात करते हुए कहा कि दर्शकों की उम्मीदें और हकीकत एकदम अलग रहीं। उनके अनुसार, 'मेरा किरदार खुद ही एक सरप्राइज है। लोगों को लगा था कि दामिनी नकारात्मक होगी, क्योंकि पिछले सीजन में मैंने नकारात्मक भूमिका की थी। सबको लगा कि वह कुछ गलत करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।'
उन्होंने आगे बताया, 'असल में वह एक आम औरत है, जिसकी अपनी परेशानियाँ हैं। वह ज्यादा ड्रामा नहीं करती और यही इस किरदार को खास बनाती है।' गौरतलब है कि रावी गुप्ता इससे पहले भी नकारात्मक किरदारों के लिए दर्शकों के बीच पहचानी जाती रही हैं, इसलिए दामिनी का यह बहुआयामी रूप उनके करियर में एक अलग पड़ाव है।
नकारात्मक किरदारों को देखने का नज़रिया बदला
अभिनेत्री ने टेलीविज़न में नकारात्मक किरदारों के पुराने और नए तरीके की तुलना करते हुए कहा, 'पहले के समय में नकारात्मक भूमिकाओं को बिल्कुल बुरा ही दिखाते थे — जैसे कि उनमें कुछ अच्छा है ही नहीं — और हर चीज़ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता था।' उन्होंने यह भी कहा कि सकारात्मक महिला किरदारों को देवी की तरह आदर्श बना दिया जाता था, जो वास्तविक जीवन से कोसों दूर था।
रावी के अनुसार, अब डेली सोप में किरदारों में गहराई आ रही है, जो एक सकारात्मक बदलाव है। यह बदलाव न केवल कहानी की दृष्टि से बल्कि सामाजिक प्रभाव की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है।
सामाजिक मुद्दों पर टीवी का नया रुख
रावी गुप्ता ने एक बड़ी बात कही — कि एक वक्त ऐसा था जब डेली सोप में महिलाओं को हमेशा दबा हुआ दिखाया जाता था और उन्हें तभी अच्छा माना जाता था जब वे परिवार के लिए त्याग करें। उन्होंने कहा, 'असल जीवन में इस तरह का दिखावा महिलाओं को पीछे धकेल सकता है।'
अभिनेत्री ने बताया कि अब टेलीविज़न पर घरेलू हिंसा और वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर बात होने लगी है। उनके अनुसार, 'ये मुद्दे समाज पर बहुत बड़ा असर छोड़ रहे हैं और इनका टीवी पर आना बेहद ज़रूरी था।' यह बदलाव दर्शाता है कि मनोरंजन माध्यम अब जागरूकता का एक सशक्त ज़रिया बन रहा है।
आगे की राह
रावी गुप्ता का यह मानना है कि टेलीविज़न इंडस्ट्री ने जो परिवर्तन की राह पकड़ी है, वह आने वाले वर्षों में और गहरी होगी। दर्शकों की बदलती माँग और सामाजिक जागरूकता के साथ कदम मिलाते हुए, भारतीय टेलीविज़न अब केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम बनने की ओर अग्रसर है।