चंडीगढ़ में रवनीत सिंह बिट्टू ने किया अंडरब्रिज का उद्घाटन, रोज़ 9.33 लाख वाहनों को मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बुधवार, 20 मई 2026 को चंडीगढ़ में एक बहुप्रतीक्षित अंडरब्रिज का उद्घाटन किया, जिससे रेलवे क्रॉसिंग पर रोज़ाना जाम से जूझने वाले 9,33,799 वाहन चालकों को सीधी राहत मिलेगी। रेलवे के टीवीयू (ट्रैफिक व्हीकल यूनिट) आँकड़ों पर आधारित यह संख्या इस मार्ग की भीड़ की गंभीरता को रेखांकित करती है।
परियोजना का विवरण और लागत
यह अंडरब्रिज परियोजना लगभग ₹12 करोड़ की लागत से पूरी हुई है। मंत्री बिट्टू ने उद्घाटन के अवसर पर मीडिया से कहा, 'कई प्रोजेक्ट सिर्फ पैसों के आधार पर आंके जाते हैं। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट 500-500 करोड़ रुपये के भी होते हैं, लेकिन यह अंडरब्रिज केवल पैसों का प्रोजेक्ट नहीं है — इसकी बहुत बड़ी ज़रूरत थी।' उन्होंने यह भी बताया कि जहाँ अन्य परियोजनाओं में एक वर्ष लगता है, वहाँ इस मार्ग पर वे 9 महीने में कार्य पूरा करवाने का लक्ष्य रखते हैं।
भूमि अधिग्रहण में क्यों नहीं हुई देरी
इस परियोजना की त्वरित प्रगति के पीछे एक अहम प्रशासनिक कारण रहा। बिट्टू ने बताया कि चूँकि पंजाब के राज्यपाल एक साथ चंडीगढ़ यूटी के प्रशासक भी हैं, इसलिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में सामान्यतः लगने वाला समय यहाँ नहीं लगा। उन्होंने कहा, 'इस प्रोजेक्ट में गवर्नर साहब ने रेलवे के साथ पूरी तरह जुड़कर काम किया — इससे हमें काफी फायदा हुआ।' उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन को भी बधाई दी।
यातायात पर असर — आँकड़े क्या कहते हैं
रेलवे के आँकड़ों के अनुसार, इस क्रॉसिंग से प्रतिदिन 9,33,799 वाहन गुज़रते हैं। डबल रेलवे लाइन होने के कारण इस मार्ग पर प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनें — 50 अप और 50 डाउन — आवाजाही करती हैं, जिससे फाटक लगातार बंद रहता था और वाहन चालकों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता था। अंडरब्रिज के शुरू होने से यह बाधा समाप्त हो जाएगी।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि रेलवे क्रॉसिंग पर बार-बार बंद होने वाले फाटक न केवल समय की बर्बादी करते हैं, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण भी बढ़ाते हैं। इस अंडरब्रिज से प्रतिदिन लाखों आम नागरिकों — कामगारों, छात्रों, व्यापारियों — को निर्बाध आवाजाही का लाभ मिलेगा। बिट्टू ने कहा कि यह स्थान उनके रोज़ के आने-जाने के मार्ग में पड़ता है, इसलिए इस परियोजना पर उनका व्यक्तिगत ध्यान बना रहेगा।
आगे की योजना
मंत्री बिट्टू के अनुसार रेलवे ने देशभर में कई अंडरब्रिज और पुल निर्मित किए हैं, परंतु जहाँ भूमि विवाद होते हैं वहाँ परियोजनाएँ दो-दो वर्षों तक अटकी रहती हैं। चंडीगढ़ की इस परियोजना को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ प्रशासनिक समन्वय से समयसीमा में उल्लेखनीय कमी आई। इस सफलता के आधार पर भविष्य में अन्य क्रॉसिंग पर भी इसी तर्ज़ पर कार्य किए जाने की संभावना है।