क्या आरबीआई ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाकर आम आदमी का भरोसा जीता है?

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क्या आरबीआई ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाकर आम आदमी का भरोसा जीता है?

सारांश

आरबीआई ने यूपीआई को पब्लिक गुड के रूप में विकसित कर आम आदमी का विश्वास जीता है। नारायण मूर्ति के विचारों का विश्लेषण करें और जानें कि कैसे डिजिटल भुगतान प्रणाली ने समाज को सशक्त बनाया है।

Key Takeaways

  • आरबीआई ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाया है।
  • डिजिटल भुगतान प्रणाली सस्ती और सुलभ बनी है।
  • नारायण मूर्ति ने नेतृत्व के मूल्यों पर जोर दिया।
  • संस्थागत यादें भारत की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक प्रेरक, उदार, दूरदर्शी और हमेशा सक्षम बनाने वाली संस्था के रूप में कार्य करता रहा है। आरबीआई ने यूपीआई को एक सार्वजनिक उपयोग की सुविधा (पब्लिक गुड) के रूप में विकसित किया है, जिससे यह आम जन के लिए सस्ता, सुलभ और भरोसेमंद बन पाया है।

उन्होंने कहा कि यूपीआई को कम लागत और सभी के लिए आसानी से उपलब्ध बनाकर आरबीआई ने आम नागरिकों का विश्वास अर्जित किया है और डिजिटल भुगतान प्रणाली को देश के हर वर्ग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जब देश में ऐसे नेता होते हैं जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं और जिनकी नीयत साफ होती है, तो वे देश को बदलने की क्षमता रखते हैं।

नारायण मूर्ति ने कहा कि यदि आप मजबूत मूल्यों वाला संगठन बनाना चाहते हैं और हर कर्मचारी के सम्मान की रक्षा करना चाहते हैं, तो एक नेता के रूप में आपको कथनी और करनी में समानता बनाए रखनी होगी।

उन्होंने कहा कि मूल्य भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यों से बनते हैं। सही मूल्य, अनुशासन, मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाता है।

आईआईएम बेंगलुरु के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने भारत में डिजिटल भुगतान में आए बदलाव के पीछे मौजूद मूल्यों, शासन व्यवस्था और संस्थागत फैसलों पर अपनी सोच साझा की।

उन्होंने कहा कि तकनीक जल्दी पुरानी हो जाती है, इसलिए समय के साथ इसे समझना और सुधारना जरूरी है।

नारायण मूर्ति ने कहा कि अब तक भारत में संस्थाओं के विकास को लेकर लिखित दस्तावेज कम बनाए गए हैं, जबकि संगठन कैसे बने, किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, नेताओं की कमियां, टीम में काम करने की जटिलता और नई तकनीक पर काम करने के अनुभव जैसे तथ्य बेहद जरूरी होते हैं।

उन्होंने बताया कि यह सारी जानकारी संस्थागत यादों का हिस्सा बनती है और इसी पर भारत की प्रगति की नींव टिकेगी। मूर्ति ने कहा कि सबसे बड़ा सबक यह है कि कोड को सार्वजनिक और कम लागत वाला बनाया जाए। इससे एकाधिकार नहीं बनता और नई सोच व नवाचार को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने कहा कि मजबूत आधार के साथ नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की आवश्यकता होती है।

नारायण मूर्ति ने छात्रों से कहा कि नेताओं को सादा जीवन जीना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, "आप भविष्य के नेता हैं और संवेदनशील पूंजीवाद के संदेशवाहक हैं, जो समाज और देश को आगे ले जाएंगे। इससे उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।"

Point of View

यह स्पष्ट है कि आरबीआई ने डिजिटल भुगतान में जो परिवर्तन लाए हैं, वे समाज के सभी वर्गों के लिए लाभकारी हैं। एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है जो समाज के समग्र विकास को प्राथमिकता दे।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

आरबीआई ने यूपीआई को पब्लिक गुड कैसे बनाया?
आरबीआई ने यूपीआई को सस्ता और सुलभ बनाकर इसे पब्लिक गुड के रूप में विकसित किया, जिससे यह आम जन के लिए भरोसेमंद हो गया।
नारायण मूर्ति का क्या कहना है?
नारायण मूर्ति ने कहा कि एक अच्छे नेता को कथनी और करनी में समानता रखनी चाहिए और मूल्य कार्यों से बनते हैं।
यूपीआई के विकास में आरबीआई की भूमिका क्या है?
आरबीआई ने यूपीआई को सभी के लिए आसानी से उपलब्ध करा कर डिजिटल भुगतान प्रणाली को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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