क्या आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी पर प्रार्थना की और जदयू में वापसी की अटकलों पर सधा जवाब दिया?

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क्या आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी पर प्रार्थना की और जदयू में वापसी की अटकलों पर सधा जवाब दिया?

सारांश

आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा में भाग लिया, जहां उन्होंने विद्या की देवी की पूजा की। इस अवसर पर, उन्होंने जदयू में अपनी वापसी की अटकलों पर संयमित प्रतिक्रिया दी। क्या यह संकेत है कि राजनीतिक समीकरणों में कोई बदलाव आ सकता है? जानें पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा की।
  • उन्होंने राजनीतिक अटकलों पर संयमित प्रतिक्रिया दी।
  • जदयू में वापसी की संभावनाएं चर्चित हैं।
  • ललन सिंह का विरोध दर्शाता है कि आरसीपी सिंह के लिए रास्ता आसान नहीं होगा।
  • राजनीतिक नेताओं को विनम्रता से असहमति व्यक्त करने की सलाह दी गई।

पटना, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने शुक्रवार को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना के पटेल हॉस्टल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्या की देवी सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और वहां उपस्थित छात्रों से संवाद किया।

धार्मिक वातावरण और उत्सव के बीच आरसीपी सिंह की उपस्थिति ने परिसर में विशेष उत्साह का माहौल बना दिया।

हालांकि, पूजा कार्यक्रम के दौरान भी राजनीतिक चर्चाएं केंद्र में रहीं। हाल ही में जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह मुद्दा और गरमा गया।

जब पत्रकारों ने ललन सिंह की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया मांगी, तो आरसीपी सिंह ने किसी का नाम लिए बिना बेहद संयमित और दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “आज देवी सरस्वती का दिन है। मैं प्रार्थना करता हूं कि सार्वजनिक जीवन में सभी के लिए देवी सरस्वती गले में निवास करें और ऐसी भाषा का प्रयोग करने की प्रेरणा दें, जो सभी के लिए सौभाग्य लेकर आए।” उनके इस बयान को प्रत्यक्ष टकराव से बचते हुए राजनीतिक शालीनता का संदेश माना जा रहा है।

आरसीपी सिंह ने आगे कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जब देवी सरस्वती लोगों की जुबान पर होती हैं, तो शब्द घटनाओं की दिशा और दशा तय करते हैं। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि असहमति और तीखी राय भी विनम्रता और गरिमा के साथ व्यक्त की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि 18 जनवरी को ललन सिंह ने आरसीपी सिंह पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि जदयू में ऐसे नेताओं के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया था कि आरसीपी सिंह के कार्यकाल में पार्टी की सीटें 72 से घटकर 42 रह गई थीं, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से जदयू को दोबारा 85 सीटों तक पहुंचाया गया।

जब आरसीपी सिंह से सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या वह जदयू में लौटने वाले हैं, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने केवल अपने घर का जिक्र किया, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ललन सिंह का दृढ़ रुख और आरसीपी सिंह की सतर्क टिप्पणियां इस बात का संकेत देती हैं कि जदयू के भीतर उनके संभावित पुनः प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण प्रतिरोध अभी भी मौजूद है।

आरसीपी सिंह ने पहले दावा किया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनका लंबा संबंध है।

Point of View

लेकिन ललन सिंह का स्पष्ट विरोध दर्शाता है कि वहां अभी भी टकराव की स्थिति मौजूद है।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी पर क्या किया?
आरसीपी सिंह ने बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा की और वहां छात्रों से संवाद किया।
क्या आरसीपी सिंह जदयू में लौटेंगे?
आरसीपी सिंह ने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन राजनीतिक अटकलें तेज हैं।
ललन सिंह ने आरसीपी सिंह के बारे में क्या कहा?
ललन सिंह ने आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी की संभावना को खारिज किया।
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