भारत-अफ्रीका संबंधों पर डॉ. एस जयशंकर की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक
सारांश
Key Takeaways
- भारत-अफ्रीका संबंधों को मजबूत करने का प्रयास
- व्यापार और निवेश पर चर्चा
- अफ्रीकी देशों को खाद्य सहायता
- शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
- वैश्विक दक्षिण के विकास में योगदान
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत-अफ्रीका संबंधों पर कंसल्टेटिव कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में आयोजित की गई, जिसमें अफ्रीकी देशों तक भारत की पहुंच, व्यापार और निवेश पर गहन चर्चा हुई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा, "आज विदेश मंत्रालय में भारत-अफ्रीका संबंधों पर कंसल्टेटिव कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें अफ्रीका के साथ हमारे ऐतिहासिक संबंधों और जनसांख्यिकीय जुड़ाव पर जोर दिया गया।"
उन्होंने आगे बताया कि इस बैठक में भारत की पहुंच, व्यापार और निवेश, LOC और ग्रांट, क्षमता निर्माण, विशेष रूप से शिक्षा और कौशल, रक्षा, और क्षेत्रीय तथा बहुपरकारी मंचों में सहयोग पर चर्चा की गई।
इसके अलावा, डॉ. जयशंकर ने कैरेबियन सागर में स्थित द्वीपीय संघीय देश सेंट किट्स एंड नेविस के विदेश मंत्री डॉ. डेन्जिल एल. डगलस से भी मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने कहा, "आज मैं सेंट किट्स एंड नेविस के विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, उद्योग, वाणिज्य और उपभोक्ता मामलों, आर्थिक विकास और निवेश मंत्री डॉ. डेन्जिल एल. डगलस को होस्ट करने के लिए खुश हूं। हमने विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सहयोग, डिजिटल क्षमता और आपदा प्रतिक्रिया पर चर्चा की।"
भारत ने वैश्विक दक्षिण के विकास और मानवीय सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए अफ्रीकी देशों मोजाम्बिक, मलावी और बुर्किना फासो को खाद्य सहायता भी प्रदान की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने सूखा प्रभावित मलावी को 1000 मीट्रिक टन चावल, बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल और बाढ़ प्रभावित मोजाम्बिक को 500 मीट्रिक टन चावल की राहत सामग्री भेजी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत ने बुर्किना फासो को मानवीय सहायता के रूप में 1000 मीट्रिक टन चावल भेजा है। इसका उद्देश्य कमजोर समुदायों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह पहल वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक विश्वसनीय विकास और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत भागीदार के रूप में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"