संभल में शिया समुदाय ने काले बैंड पहनकर ईद की नमाज अदा की, खमेनेई की मृत्यु पर शोक प्रकट किया

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संभल में शिया समुदाय ने काले बैंड पहनकर ईद की नमाज अदा की, खमेनेई की मृत्यु पर शोक प्रकट किया

सारांश

संभल में शिया समुदाय ने ईद की नमाज के दौरान काले बैंड पहनकर ईरान के नेता खमेनेई की मृत्यु पर शोक जताया। यह उनका एकजुटता और भावनात्मक क्षति का प्रतीक था।

Key Takeaways

  • शिया समुदाय ने ईद की नमाज के दौरान काला बैंड पहना।
  • यह बैंड खमेनेई की मृत्यु पर शोक का प्रतीक है।
  • अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की गई।
  • कश्मीर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
  • दुकानों और कार्यक्रमों को बंद किया गया।

संभल, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संभल जिले में शनिवार को शिया समुदाय के सदस्यों ने ईद की नमाज अदा की। इस अवसर पर उन्होंने काले बैंड पहनकर आए, जो कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई की मृत्यु पर शोक और विरोध का प्रतीक था।

नमाज के दौरान सिरसी क्षेत्र में कुछ लोगों ने नारेबाजी की, जिसमें 'अमेरिका मुर्दाबाद' जैसे नारे शामिल थे। पुलिस ने वहां स्थिति पर नजर रखी और शांति बनाए रखने का प्रयास किया। हालांकि, कुछ सदस्यों और पुलिस के बीच थोड़ी बहस हुई, जिसे जल्दी ही नियंत्रित कर लिया गया।

शिया समुदाय ने काला बैंड पहनने को अपने शोक और एकजुटता का प्रतीक बताया। यह कदम उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए उठाया। नमाज के बाद एक जुलूस भी निकाला गया, जिसमें खमेनेई के प्रति सम्मान और उनकी मृत्यु के प्रति विरोध दोनों व्यक्त किए गए।

यह विरोध प्रदर्शन अमेरिका और ईरान के संयुक्त हमलों में खमेनेई की कथित हत्या को लेकर हो रहे हैं, जिसने भारत में मुस्लिम संगठनों के बीच व्यापक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय ने ईद के अवसर पर अपने शोक और विरोध को व्यक्त किया।

इस घटना का संदर्भ उस रिपोर्ट से है जिसमें कहा गया कि संयुक्त अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्लाह खमेनेई की मृत्यु हुई। इस खबर ने भारत में मुस्लिम संगठनों के बीच भारी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

कश्मीर में, जहां शिया आबादी अधिक है, लाल चौक, सईदा कदल, बुडगाम, बंदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए।

लखनऊ की मस्जिदों के आसपास भी लोग इकट्ठा हुए, नारे लगाए और महिलाओं ने खमेनेई की तस्वीरें पकड़ी हुई थीं, जो रोती हुई नजर आईं। पंजाब के लुधियाना में भी प्रदर्शन हुए, जहां शियाओं की संख्या कम होने के बावजूद पुतलों का दहन किया गया। अजमेर में शिया समुदाय ने तीन दिन की शोक अवधि की घोषणा की।

कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में स्थिति शांतिपूर्ण रही, जहां खमेनेई एक बार गए थे। वहां की दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों ने स्वेच्छा से बंद रहने का निर्णय लिया और गांव में तीन दिन का शोक घोषित किया। सभी सार्वजनिक कार्यक्रम और उत्सव स्थगित कर दिए गए ताकि शांति बनी रहे।

Point of View

बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भी एक गहरी परत को दर्शाती है। शिया समुदाय द्वारा खमेनेई की मृत्यु पर जताया गया शोक, भारत में मुस्लिम संगठनों के बीच आपसी सहयोग और एकता को प्रोत्साहित करता है।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

ईद की नमाज में काले बैंड पहनने का क्या उद्देश्य था?
काले बैंड पहनने का उद्देश्य ईरान के नेता खमेनेई की मृत्यु पर शोक और विरोध व्यक्त करना था।
क्या इस विरोध प्रदर्शन में कोई हिंसा हुई?
हालांकि कुछ सदस्यों और पुलिस के बीच हल्की बहस हुई, लेकिन इसे जल्दी ही नियंत्रित कर लिया गया।
क्या अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह के प्रदर्शन हुए?
हाँ, कश्मीर, लखनऊ, लुधियाना और अजमेर में भी इस तरह के प्रदर्शन हुए।
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