26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या सेना ने गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल की?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या सेना ने गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल की?

सारांश

भारतीय सेना ने गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। यह आत्मनिर्भरता देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे लंबी अवधि तक युद्ध संचालन की क्षमता मजबूत होती है। जानें इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत आत्मनिर्भरता हासिल की गई है।
लंबी अवधि तक चलने वाले युद्धों की तैयारी की जा रही है।
स्वदेशीकरण को केंद्रीय रणनीति बनाया गया है।
मेक इन इंडिया के तहत आदेश-पैकेज तैयार किया गया है।
आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है।

नई दिल्ली, 31 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को मजबूत कर रही है। विशेष रूप से लंबी अवधि तक चलने वाले युद्धों के लिए तैयारियां की जा रही हैं। इसका एक मजबूत आधार गोला-बारूद की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

सेना के अनुसार, गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली गई है। तेजी से बदलते सुरक्षा वातावरण, अनिश्चितताओं और दीर्घकालिक संकटों के दौर में, किसी भी देश की सैन्य क्षमता आधुनिक हथियारों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि लगातार संचालन की क्षमता पर निर्भर करती है। गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स इसी निरंतरता के मूल में होते हैं। इसी महत्व को समझते हुए, भारतीय सेना ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता को अपनी तैयारी की केंद्रीय रणनीति बना लिया है।

पारंपरिक उत्पादन प्रणालियों और विदेशी आयात पर भारतीय सेना का गोला-बारूद लंबे समय तक निर्भर रहा है। इससे वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखलाओं में व्यवधान आने पर जोखिम बढ़ जाता था। सेना के अनुसार, हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने यह स्पष्ट किया है कि वे देश जो घरेलू स्तर पर गोला-बारूद का सतत उत्पादन बनाए रख सकते हैं, वे लंबे समय तक अपनी सैन्य गति को बनाए रखते हैं।

इसी चुनौती का समाधान करते हुए, भारतीय सेना ने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दृष्टि के अनुरूप स्वदेशीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया है। भारतीय सेना का कहना है कि वर्तमान में वह लगभग 200 प्रकार के गोला-बारूद और प्रिसीजन म्यूनिशन का संचालन करती है। नीतिगत सुधारों और उद्योग-सहयोग के माध्यम से इनमें से 90 फीसदी से अधिक का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण हो चुका है। इसका लाभ यह है कि अब इन्हें देश के भीतर से ही खरीदा जा रहा है।

सेना का कहना है कि शेष श्रेणियों पर रिसर्च संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों और निजी क्षेत्र के प्रयासों के माध्यम से कार्य जारी है। पिछले चार-पांच वर्षों में खरीद प्रक्रियाओं का पुनर्गठन किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और आपूर्ति के अनेक विकल्प उपलब्ध हों। मेक इन इंडिया के तहत लगभग 16,000 करोड़ रुपए का आदेश-पैकेज तैयार किया गया है। वहीं, पिछले तीन वर्षों में करीब 26,000 करोड़ रुपए के गोला-बारूद के ऑर्डर स्वदेशी निर्माताओं को दिए गए हैं। विभिन्न प्रकारों में अब बहु-स्रोत उपलब्ध होने से आपूर्ति-श्रृंखला और अधिक मजबूत हुई है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगला चरण इन उपलब्धियों के और सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित है। विशेषकर प्रोपेलेंट और फ्यूज जैसे कच्चे माल की घरेलू आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण अवसंरचना के आधुनिकीकरण, तकनीक हस्तांतरण में तेजी और कठोर गुणवत्ता-मानकों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। ये सभी कदम मिलकर एक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर गोला-बारूद पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेंगे। यह ध्यान देने योग्य है कि स्वदेशी क्षमता को आधार बनाकर भारतीय सेना न केवल लंबी अवधि तक संचालन की अपनी क्षमता को बढ़ा रही है, बल्कि राष्ट्रीय और स्ट्रैटेजिक तैयारियों को भी मजबूत कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। यह सुनिश्चित करता है कि हम अपने सुरक्षा आवश्यकताओं को स्वदेशी स्रोतों से पूरा कर सकें, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता बनी रहे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना ने गोला-बारूद की आत्मनिर्भरता कब हासिल की?
भारतीय सेना ने गोला-बारूद की आपूर्ति में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हाल ही में हासिल की है।
इस आत्मनिर्भरता का महत्व क्या है?
यह आत्मनिर्भरता देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है और दीर्घकालिक युद्ध संचालन की तैयारी को मजबूत करती है।
सेना ने आत्मनिर्भरता के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सेना ने नीतिगत सुधारों और उद्योग-सहयोग के माध्यम से गोला-बारूद के स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया है।
क्या यह आत्मनिर्भरता केवल गोला-बारूद तक सीमित है?
नहीं, यह आत्मनिर्भरता गोला-बारूद के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स में भी है।
मेक इन इंडिया का इस आत्मनिर्भरता में क्या योगदान है?
मेक इन इंडिया ने स्वदेशीकरण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे भारतीय सेना की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले