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श्री कालाराम मंदिर: धार्मिक धरोहर से सामाजिक आंदोलन की ओर

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श्री कालाराम मंदिर: धार्मिक धरोहर से सामाजिक आंदोलन की ओर

सारांश

श्री कालाराम मंदिर नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो न केवल धार्मिक मान्यताओं का केंद्र है बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी है। जानिए इसके इतिहास और महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

श्री कालाराम मंदिर का संबंध भगवान राम के वनवास से है।
यह मंदिर 1782 में स्थापित हुआ था।
यहाँ धार्मिक उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं।
भीमराव अंबेडकर का इस मंदिर से महत्वपूर्ण संबंध है।
मंदिर वास्तुकला और ऐतिहासिकता का अद्भुत उदाहरण है।

महाराष्ट्र, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की पवित्र भूमि पर अनगिनत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, अनूठी परंपराओं और रहस्यमयी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उनमें से एक है 'श्री कालाराम मंदिर', जो नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित है और प्रभु श्री राम को समर्पित है।

श्री कालाराम मंदिर एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जिसका निर्माण काले पत्थरों से किया गया है। यहाँ की मूर्तियाँ भी विशिष्ट काले पत्थरों से बनी हुई हैं, जिसके कारण इसे कालाराम नाम दिया गया है। इस मंदिर में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की काली प्रतिमाएँ विराजमान हैं, जिन्हें गोदावरी नदी से प्राप्त किया गया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर उस स्थान से जुड़ा है जहाँ भगवान श्री राम ने 14 वर्षों का वनवास बिताया था। माना जाता है कि यही वह पंचवटी क्षेत्र है, जहाँ भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास का समय बिताया था।

श्री कालाराम मंदिर का निर्माण 1782 ईस्वी में हुआ था, जिसकी लंबाई 74 मीटर और चौड़ाई 32 मीटर है। मंदिर के चारों दिशाओं में 4 दरवाजे हैं, और महाद्वार से प्रवेश करते ही एक भव्य सभामंडप दिखाई देता है, जिसकी ऊँचाई 12 फीट है।

मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियाँ हैं, जो राम के 14 वर्ष के वनवास का प्रतीक हैं। मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ हैं, जो जीवन के 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहाँ पर हनुमान जी की भी एक काली मूर्ति है, जो प्रभु श्री राम के चरणों की ओर देखती है।

मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा जैसे उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। इस दौरान देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन करने और उत्सव का हिस्सा बनने के लिए यहाँ आते हैं।

श्री कालाराम मंदिर न केवल एक प्राचीन धार्मिक विरासत है, बल्कि इसका इतिहास सामाजिक विद्रोह से भी जुड़ा हुआ है। यह 1930 में डॉ. भीमराव अंबेडकर के मंदिर प्रवेश आंदोलन का केंद्र बना। यहीं से डॉ. बीआर अंबेडकर ने दलितों को मंदिर में प्रवेश के लिए एक प्रमुख आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके फलस्वरूप दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सामाजिक बदलावों से भी जुड़ा है। यह न केवल श्रद्धा का स्थल है, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई का भी प्रतीक है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कालाराम मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर महाराष्ट्र के नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित है।
इस मंदिर का इतिहास क्या है?
यह मंदिर 1782 ईस्वी में बना और इसका संबंध भगवान श्री राम के वनवास से है।
यहाँ कौन-कौन से उत्सव मनाए जाते हैं?
यहाँ रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा जैसे प्रमुख उत्सव मनाए जाते हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का इस मंदिर से क्या संबंध है?
डॉ. अंबेडकर ने 1930 में दलितों के मंदिर में प्रवेश के लिए एक आंदोलन का नेतृत्व किया, जो यहाँ से शुरू हुआ।
मंदिर की विशेषताएँ क्या हैं?
मंदिर में काले पत्थरों से बनी मूर्तियाँ, 14 सीढ़ियाँ और 84 स्तंभ हैं, जो विशेष प्रतीक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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