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क्या श्वेता त्रिपाठी ने कभी खुद को आउट साइडर महसूस किया?

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क्या श्वेता त्रिपाठी ने कभी खुद को आउट साइडर महसूस किया?

सारांश

श्वेता त्रिपाठी ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी 'बंदरफुल' के माध्यम से फिल्म इंडस्ट्री में नए अवसरों का निर्माण करने की बात की है। उन्होंने बताया कि वह कभी भी बाहरी नहीं रही और अब दूसरों को मौका देने का संकल्प लिया है। जानिए उनके सफर के बारे में।

मुख्य बातें

उद्यमिता : श्वेता ने नई कहानियों को सामने लाने का संकल्प लिया है।
अपनापन : उन्होंने हमेशा इंडस्ट्री में अपनापन महसूस किया।
जुनून : वह जुनूनी लोगों के साथ काम करना चाहती हैं।
सामाजिक प्रभाव : कहानियों का समाज पर गहरा प्रभाव हो सकता है।
सीखने की प्रक्रिया : प्रोड्यूसर बनना एक सीखने की प्रक्रिया है।

मुंबई, 28 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री और निर्माता श्वेता त्रिपाठी ने अपनी नई प्रोडक्शन कंपनी 'बंदरफुल' की शुरुआत के पीछे की प्रेरणा और फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों को साझा किया। श्वेता के अनुसार, उन्होंने हमेशा इंडस्ट्री में अपनापन महसूस किया और अब वह दूसरों को मौका देना चाहती हैं।

श्वेता ने कहा, "मुझे कभी यह नहीं लगा कि मैं इस इंडस्ट्री के बाहर से हूं; मुझे यहां हमेशा एक सुरक्षित स्थान मिला।"

अपनी प्रोडक्शन कंपनी के विषय में श्वेता ने कहा, "क्यों इंतज़ार करें कि कोई और कहानी को कहानी सुनाए? बहुत सारी प्रतिभाएं और कहानियां हैं। मैं उन लोगों को जानती हूं और अगर मेरे पास संसाधन हैं, तो मैं उन्हें अवसर देना चाहती हूं।"

उन्होंने आगे कहा, "मैं अपने सफर में कई लोगों से मिलती हूं और मुझे कुछ कहानियां बहुत प्रभावित करती हैं। मैं चाहती हूं कि दुनिया भी इन्हें महसूस करे। इसलिए मैंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की।"

'बंदरफुल' प्रोडक्शन हाउस का लक्ष्य उन कहानियों को बढ़ावा देना है जो रूढ़ियों, व्यावसायिक दबावों या सामाजिक बंधनों से मुक्त हों। श्वेता ने कहा, "मुझे खुशी है कि लोगों ने मुझ पर भरोसा किया। फिल्ममेकर्स ने मेरी प्रतिभा और जुनून को देखा। अब मैं दूसरों में वह जुनून देखना चाहती हूं और उन्हें मंच देना चाहती हूं।"

वे ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहती हैं जो सिनेमा और समाज पर प्रभाव डालने वाली कहानियों के प्रति जुनूनी हों।

इंडस्ट्री में अपने अनुभव साझा करते हुए श्वेता ने कहा, "मुझे शुरू से ही गुनीत मोंगा, अनुराग कश्यप और करण जौहर जैसे लोगों का साथ मिला। मैंने कभी खुद को बाहरी नहीं माना। मेरे लिए यह सब भावनाओं और जुड़ाव के बारे में है, न कि जेंडर, जाति या वर्ग के बारे में।"

प्रोड्यूसर बनने के अनुभव को श्वेता ने एक नए सफर के रूप में दर्शाया। उन्होंने कहा, "प्रोड्यूसर बनना एक सीखने की प्रक्रिया है। हर कदम मुझे कुछ नया सिखा रहा है और मैं इस सफर के लिए तैयार हूं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्वेता त्रिपाठी ने प्रोडक्शन कंपनी क्यों शुरू की?
श्वेता ने प्रोडक्शन कंपनी शुरू करने का निर्णय लिया ताकि वह दूसरों को अवसर दे सकें और नई कहानियों को सामने ला सकें।
क्या श्वेता त्रिपाठी ने आउट साइडर महसूस किया?
श्वेता ने कभी खुद को आउट साइडर नहीं माना, बल्कि उन्होंने हमेशा इंडस्ट्री में अपनापन महसूस किया।
'बंदरफुल' प्रोडक्शन हाउस का उद्देश्य क्या है?
'बंदरफुल' का उद्देश्य ऐसी कहानियों को बढ़ावा देना है जो रूढ़ियों और सामाजिक बंधनों से मुक्त हों।
राष्ट्र प्रेस
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