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सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 19 दिन: फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने सरकार से माँगा समाधान

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सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 19 दिन: फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने सरकार से माँगा समाधान

सारांश

28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन साढ़े आठ किलो घट चुका है। अभिनेत्री फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई और सरकार से बातचीत की अपील की — श्वेता ने साथ ही सीजेपी के तरीके पर आपत्ति भी जताई।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं; अब तक साढ़े आठ किलो वजन घट चुका है।
फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर अपील की कि सरकार बातचीत से जल्द समाधान निकाले।
श्वेता तिवारी ने वांगचुक के मुद्दे का समर्थन किया, लेकिन सीजेपी के तरीके से असहमति जताई।
दोनों अभिनेत्रियों ने युवाओं और शिक्षा के भविष्य को इस आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बताया।
सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और इस दौरान उनका वजन लगभग साढ़े आठ किलो कम हो चुका है। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्रियों फातिमा सना शेख और श्वेता तिवारी ने गुरुवार, 16 जुलाई को सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए सरकार से शांतिपूर्ण समाधान की अपील की।

फातिमा सना शेख की अपील

अभिनेत्री फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर सोनम वांगचुक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'सोनम वांगचुक जी के अनशन को आज 19 दिन हो गए हैं। हमें तब तक इंतजार नहीं करना चाहिए जब तक कि उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ न जाए। सोनम जी ने हमारे देश के लिए बहुत बड़े और अच्छे काम किए हैं। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए उन्हें इस तरह अपनी जान दांव पर न लगानी पड़े, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।'

अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में उन्होंने आगे लिखा, 'राजनीति को अलग रखकर देखें तो हमारे युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना सबसे जरूरी है। सोनम जी को इस तरह कमजोर होते देखना बेहद दुखद है। उम्मीद है कि सरकार बातचीत के जरिए जल्द ही इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकालेगी।'

श्वेता तिवारी का बयान और सीजेपी पर आपत्ति

अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने कहा, 'सोनम वांगचुक जी शिक्षा और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए एक सही और जरूरी मुद्दे के लिए आवाज उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर ध्यान दिया जाना चाहिए और सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।'

हालाँकि, तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका समर्थन सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के लिए नहीं है। उन्होंने लिखा, 'जिस तरह से सीजेपी इस मामले को संभाल रहे हैं, मैं उससे सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है कि वे सोनम वांगचुक के संघर्ष का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। मेरा समर्थन केवल सोनम वांगचुक और उस मुद्दे के लिए है, न कि किसी राजनीतिक समूह के लिए।'

सोनम वांगचुक का संघर्ष और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातीय सुरक्षा और राज्य का दर्जा देने की माँग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं। गौरतलब है कि वांगचुक पहले भी इसी मुद्दे पर भूख हड़ताल कर चुके हैं। उनकी बिगड़ती सेहत ने देशभर में चिंता की लहर पैदा कर दी है और बॉलीवुड हस्तियों की यह प्रतिक्रिया इस आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन मिलने का संकेत है।

आम जनता और सोशल मीडिया पर असर

दोनों अभिनेत्रियों की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर #SonamWangchuk ट्रेंड करने लगा। नागरिकों और युवाओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। श्वेता तिवारी ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा, 'हमारे राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन हम ऐसे व्यक्ति को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते जिसने अपना जीवन देश और शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया है।'

आगे क्या

अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि यदि जल्द बातचीत नहीं हुई तो उनकी सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। देश की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मानवीय संकट को किस तरह संबोधित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि सेलिब्रिटी समर्थन नीतिगत बदलाव में कितना तब्दील होता है। श्वेता तिवारी का सीजेपी पर सवाल उठाना दर्शाता है कि इस आंदोलन के इर्द-गिर्द राजनीतिक विनियोग की चिंता खुद समर्थकों में भी है। केंद्र सरकार की चुप्पी इस मानवीय संकट को और गहरा कर रही है — एक ऐसे व्यक्ति के मामले में जिसकी साख किसी दल विशेष से नहीं, बल्कि दशकों की जमीनी सेवा से बनी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक किस मुद्दे पर भूख हड़ताल कर रहे हैं?
सोनम वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातीय सुरक्षा और राज्य का दर्जा देने की माँग को लेकर 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं। यह उनका इस मुद्दे पर दूसरा बड़ा आंदोलन है।
सोनम वांगचुक की सेहत अभी कैसी है?
19 दिनों की भूख हड़ताल में वांगचुक का वजन लगभग साढ़े आठ किलो कम हो चुका है। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर देशभर में चिंता है और समर्थकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
फातिमा सना शेख ने सोनम वांगचुक के बारे में क्या कहा?
फातिमा सना शेख ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि सरकार को बातचीत के जरिए जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए और वांगचुक को अपनी जान दांव पर लगाने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने युवाओं और छात्रों के भविष्य को इस मुद्दे का केंद्र बताया।
श्वेता तिवारी ने सीजेपी पर आपत्ति क्यों जताई?
श्वेता तिवारी ने कहा कि उन्हें लगता है कि सीजेपी सोनम वांगचुक के संघर्ष का इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन केवल वांगचुक और उनके मुद्दे के लिए है, किसी राजनीतिक संगठन के लिए नहीं।
क्या सरकार ने सोनम वांगचुक की माँगों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समर्थकों का कहना है कि यदि जल्द बातचीत नहीं हुई तो वांगचुक की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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