क्यों कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी की आलोचना की?
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नई दिल्ली, 24 जून (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका द्वारा अपने नागरिकों के लिए भारत यात्रा से संबंधित ट्रैवल एडवाइजरी जारी करने की आलोचना की। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि अमेरिका हमारा एक प्रिय मित्र है और हमारे बीच अच्छे रिश्ते हैं। फिर भी, वह इस तरह की एडवाइजरी क्यों जारी कर रहा है? उनकी एडवाइजरी में कहा गया है कि अमेरिकी महिलाओं को भारत में अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए।
सुप्रिया ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका को वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। एक ओर, वह पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष असीम मुनीर को आमंत्रित करता है और उसे महान बताता है, वहीं दूसरी ओर, भारत के लिए ऐसी एडवाइजरी जारी करता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिका ने 16 जून को अपने नागरिकों के लिए लेवल-2 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की, जिसमें यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यह एडवाइजरी अपराध, आतंकवाद और कुछ क्षेत्रों में बढ़ते जोखिमों के कारण जारी की गई है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि अमेरिका की यह ट्रैवल एडवाइजरी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने मोदी सरकार से इस मामले में अमेरिका के खिलाफ कठोर कदम उठाने की अपील की, लेकिन उनके रवैये से स्पष्ट है कि वे इस दिशा में कोई कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को इस अमेरिकी कदम की खुलकर आलोचना करनी चाहिए, क्योंकि यह भारत के पर्यटन को नुकसान पहुंचा सकता है और हमारी अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करेगा। लेकिन, पीएम मोदी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 17 बार सीजफायर का श्रेय लिया है, लेकिन पीएम मोदी एक शब्द भी नहीं बोलते।
सुप्रिया ने यह भी कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में संलिप्त आतंकियों के खिलाफ मोदी सरकार को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि इस दिशा में वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हाल ही में एक जानकारी सामने आई है कि पहलगाम आतंकी हमले में जिन आतंकियों की स्कैच जारी की गई थी, वे असल में उन आतंकियों की नहीं थीं।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अमित शाह गृहमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है। पिछले दो वर्षों से मणिपुर जल रहा है, लेकिन वे इस पर कोई कार्रवाई करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला होने पर भी वे कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।