तेजस्वी यादव का आरोप: नीतीश कुमार ने गोडसे की नीतियों को सत्ता में स्थापित किया
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का इस्तीफा भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का परिणाम है।
- तेजस्वी यादव ने भीमराव अंबेडकर की आत्मा को आहत करने का आरोप लगाया।
- पिछड़े और दलित समुदायों को एकजुट रहने की आवश्यकता है।
- सम्राट चौधरी की राजनीति लालू यादव की विचारधारा पर आधारित है।
पटना, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा के विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा-आरएसएस को बढ़ावा देने वाली उनकी सोच का यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे की नीतियों का समर्थन करने वालों को सत्ता सौंपकर भीमराव अंबेडकर की आत्मा और विचार को आहत किया गया है।
राजद कार्यालय में भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि आज की राजनीति के खिलाफ पिछड़ा, दलित, अतिपिछड़ा, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट रहना होगा। भाजपा की नीतियों का विरोध करने के लिए संघर्ष और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जो लोग परिवारवाद की राजनीति की आलोचना करते थे, वे ही आज बिना संघर्ष और सामाजिक कार्यों के मंत्री बन रहे हैं। उन्होंने सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने को लेकर तंज करते हुए कहा कि उन्हें लालू यादव की पाठशाला का छात्र बताया।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में याद दिलाया कि लालू यादव ने ही सम्राट चौधरी को पहली बार विधायक और मंत्री बनाया था। उन्होंने कहा कि आज वे भले ही दूसरी राजनीति कर रहे हों, लेकिन उनकी नींव लालू यादव की विचारधारा पर ही है। भाजपा को भी अब लालू यादव के विचारों के इर्द-गिर्द राजनीति करनी पड़ रही है।