19 अक्टूबर 2026
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टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग: कांग्रेस का महायुति सरकार पर आरोप — बिश्नोई गैंग को मिल रही राजनीतिक शह

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टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग: कांग्रेस का महायुति सरकार पर आरोप — बिश्नोई गैंग को मिल रही राजनीतिक शह

सारांश

टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर मुंबई में हुई फायरिंग के बाद कांग्रेस ने महायुति सरकार पर सीधे निशाना साधा है। एमपीसीसी अध्यक्ष सपकाल का सवाल — साबरमती जेल से बिश्नोई का साम्राज्य 'सरकारी मंजूरी' के बिना नामुमकिन, फडणवीस इस्तीफा दें।

मुख्य बातें

एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 19 अक्टूबर 2026 को महायुति सरकार पर संगठित अपराध को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग के साथ सलमान खान , रोहित शेट्टी पर हमले और बाबा सिद्दीकी की हत्या को हाई-प्रोफाइल अपराध की श्रृंखला बताया गया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय का अगस्त 2023 का सीआरपीसी धारा 268 के तहत आदेश गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल से बाहर ले जाने से रोकता है।
सपकाल ने देवेंद्र फडणवीस को चुनौती — केंद्र से बिश्नोई की कानूनी छूट रद्द कराएँ और उसे मुंबई लाएँ।
शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी एसपी ने भी महायुति सरकार की आलोचना की।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग की घटना के बाद महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर राज्य में संगठित अपराध को पनाह देने और 'पूर्ण अराजकता' की स्थिति बनाए रखने का आरोप लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है जब मुंबई में हाई-प्रोफाइल हस्तियों को निशाना बनाने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

मुख्य आरोप और सवाल

सपकाल ने सवाल उठाया कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई अहमदाबाद की साबरमती जेल के अंदर से बिना किसी 'सरकारी संरक्षण या राजनीतिक सहायता' के इतना विशाल आपराधिक साम्राज्य कैसे चला सकता है। उन्होंने अभिनेता टाइगर श्रॉफ, फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी, अभिनेता सलमान खान पर हुए हमलों और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या का हवाला देते हुए कहा कि ये घटनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि अपराधी अब पुलिस से नहीं डरते।

सपकाल ने आरोप लगाया, 'अगर मुंबई के बीचोंबीच दिनदहाड़े एक मशहूर फिल्म अभिनेता को निशाना बनाया जा सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या हाल रह जाता है? सरकार की सीधी मंजूरी के बिना यह नामुमकिन है।'

केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश और कानूनी पेच

कांग्रेस नेता ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2023 में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 268 के तहत एक आदेश जारी किया था, जो राज्य पुलिस बलों को बिश्नोई को पूछताछ के लिए गुजरात की साबरमती जेल से बाहर स्थानांतरित करने से रोकता है। यह कानूनी प्रतिबंध हर वर्ष नवीनीकृत किया जाता है। सपकाल ने महाराष्ट्र सरकार को सीधी चुनौती दी कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय से बिश्नोई की यह कानूनी छूट रद्द कराए और उसे पूछताछ व मुकदमे के लिए मुंबई लाए।

उन्होंने तर्क दिया कि असम पुलिस विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए गुजरात या दिल्ली तक जा सकती है और बिहार में दर्ज एफआईआर मुंबई में सीबीआई जांच शुरू करवा सकती है — फिर महाराष्ट्र सरकार गुजरात में बंद एक गैंगस्टर से पूछताछ करने में खुद को असमर्थ क्यों बता रही है।

पुलिस पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप

सपकाल ने दावा किया कि मुंबई पुलिस का खौफ अब 'बीते जमाने की बात' हो गई है क्योंकि कथित तौर पर कानून प्रवर्तन का इस्तेमाल केवल जबरन वसूली और राजनीतिक धमकियों के लिए हो रहा है। उन्होंने पूर्व कांग्रेस विधायक राहुल बोंद्रे के खिलाफ जारी कथित पुलिस उत्पीड़न का हवाला दिया, जो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से इनकार करने के बाद से जारी है।

विपक्ष की एकजुट आवाज़

गौरतलब है कि सिर्फ एमपीसीसी ही नहीं, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी एसपी) ने भी टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले को लेकर BJP के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की आलोचना की है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल एकजुट होकर राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं।

आगे क्या होगा

सपकाल ने साफ कहा कि अगर यह सरकार गैंगस्टरों, ड्रग तस्करों और रेत माफियाओं पर लगाम नहीं लगा सकती, तो उसे सत्ता में बने रहने का 'कोई नैतिक अधिकार नहीं' है और उसे तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना अहम होगा कि महाराष्ट्र सरकार बिश्नोई की कानूनी छूट को चुनौती देने के लिए केंद्र से संपर्क करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका केंद्रीय सवाल नज़रअंदाज़ करने वाला नहीं है — सीआरपीसी की धारा 268 के तहत बिश्नोई की कानूनी सुरक्षा सालों से नवीनीकृत होती रही है, और इसकी जवाबदेही केंद्र व राज्य दोनों पर बनती है। बाबा सिद्दीकी की हत्या से लेकर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग तक, मुंबई में हाई-प्रोफाइल निशानों की यह श्रृंखला बताती है कि गैंगस्टर नेटवर्क की परिचालन क्षमता जेल की दीवारों से परे जा चुकी है। असली सवाल यह है कि तकनीकी-कानूनी अड़चनें असली बाधाएँ हैं या सुविधाजनक ढाल — और इसका जवाब देने की जिम्मेदारी सिर्फ विपक्ष नहीं, सरकार की भी है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग की घटना क्या थी?
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी को निशाना बनाकर फायरिंग की गई, जो एक हाई-प्रोफाइल घटना के रूप में सामने आई। इस घटना ने मुंबई में संगठित अपराध और सेलिब्रिटी सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी।
कांग्रेस ने महायुति सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि महायुति सरकार संगठित अपराध गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण दे रही है और लॉरेंस बिश्नोई जेल से अपना नेटवर्क 'सरकारी मंजूरी' के बिना नहीं चला सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस्तीफे की माँग भी की।
सीआरपीसी धारा 268 के तहत बिश्नोई की कानूनी सुरक्षा क्या है?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2023 में सीआरपीसी की धारा 268 के तहत एक आदेश जारी किया था, जो राज्य पुलिस को लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की साबरमती जेल से बाहर स्थानांतरित करने से रोकता है। यह आदेश हर वर्ष नवीनीकृत किया जाता है।
कांग्रेस ने सरकार से क्या माँग की है?
सपकाल ने माँग की है कि महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय से बिश्नोई की कानूनी छूट रद्द कराए और उसे मुंबई लाकर पूछताछ व मुकदमे का सामना कराए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह नहीं कर सकती, तो उसे नैतिक रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए।
और कौन-से विपक्षी दल ने महायुति सरकार की आलोचना की?
शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी एसपी) ने भी टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग को लेकर BJP के नेतृत्व वाली महायुति सरकार की आलोचना की है। इस प्रकार महाराष्ट्र का पूरा प्रमुख विपक्ष एकजुट होकर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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