त्रिपुरा में असम राइफल्स और डीआरआई का बड़ा ऑपरेशन: मेथामफेटामाइन की खेप जब्त, एक गिरफ्तारी

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त्रिपुरा में असम राइफल्स और डीआरआई का बड़ा ऑपरेशन: मेथामफेटामाइन की खेप जब्त, एक गिरफ्तारी

सारांश

त्रिपुरा में असम राइफल्स और डीआरआई ने मिलकर ₹16 करोड़ मूल्य की मेथामफेटामाइन गोलियों की तस्करी का मामला उजागर किया। इस ऑपरेशन के दौरान एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • असम राइफल्स और डीआरआई ने मिलकर ₹16 करोड़ की मेथामफेटामाइन जब्त की।
  • राजू देब नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
  • यह ऑपरेशन नशीली दवाओं की तस्करी पर एक महत्वपूर्ण प्रहार है।
  • नशीले पदार्थों की तस्करी का मुख्य मार्ग म्यांमार से होकर जाता है।
  • त्रिपुरा का क्षेत्र नशीले पदार्थों की सीमा पार तस्करी के लिए संवेदनशील है।

अगरतला, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम राइफल्स और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने एक संयुक्त कार्रवाई में त्रिपुरा में ₹16 करोड़ से अधिक कीमत की मेथामफेटामाइन गोलियों की बड़ी खेप जब्त की है। इसके साथ ही, नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

असम राइफल्स के एक अधिकारी ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर एक महत्वपूर्ण चोट करते हुए अर्धसैनिक बल ने विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर और डीआरआई के साथ समन्वय कर, शनिवार रात खोवाई जिले के तेलियामुरा में एक व्यक्ति को पकड़ा।

इस कार्रवाई के दौरान, त्रिपुरा रजिस्ट्रेशन संख्या वाली एक पिक-अप गाड़ी को रोका गया। गाड़ी की संपूर्ण तलाशी लेने पर लगभग दो लाख मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद हुईं, जिन्हें आमतौर पर 'याबा टैबलेट' के नाम से जाना जाता है।

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान राजू देब (44) के रूप में हुई है, जो पश्चिम त्रिपुरा के जलीलपुर का निवासी है। आरोपी को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए डीआरआई को सौंप दिया गया है।

बयान में आगे बताया गया है कि यह ऑपरेशन नशीले पदार्थों की तस्करी के खतरे से निपटने और इस क्षेत्र में सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए असम राइफल्स के निरंतर संकल्प को दर्शाता है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि ये नशीले पदार्थ संभवतः म्यांमार से तस्करी करके लाए गए थे और मिजोरम तथा दक्षिणी असम के रास्ते गुपचुप तरीके से त्रिपुरा में लाए गए थे, जिनका लक्ष्य उन्हें आगे बांग्लादेश में तस्करी करना था।

मिजोरम की म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा और बांग्लादेश के साथ 318 किलोमीटर लंबी खुली और पहाड़ी सीमा लगती है, जिससे यह क्षेत्र नशीले पदार्थों की सीमा पार तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।

त्रिपुरा, जिसकी बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी सीमा है और जो तीन तरफ से इस पड़ोसी देश से घिरा हुआ है, वह भी सीमा पार प्रवासन और तस्करी के मामले में अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है।

म्यांमार से सटे चिन राज्य को नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद, दुर्लभ वन्यजीवों, कीमती औषधीय पौधों, विदेशी सिगरेट, म्यांमार की सुपारी (कत्था) और अन्य प्रतिबंधित सामानों की तस्करी का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। इन अवैध सामानों की तस्करी अक्सर मिजोरम के छह जिलों के रास्ते की जाती है।

म्यांमार से तस्करी किए जाने वाले सबसे सामान्य पदार्थों में मेथामफेटामाइन की गोलियां शामिल हैं। अक्सर क्रेजी ड्रग कहा जाने वाला यह पदार्थ मेथामफेटामाइन और कैफीन का मिश्रण होता है, और भारत में इन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

Point of View

बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ती तस्करी की समस्या को भी उजागर करती है। समय की मांग है कि नशीले पदार्थों की तस्करी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

असम राइफल्स और डीआरआई ने कब और कहाँ संयुक्त ऑपरेशन किया?
असम राइफल्स और डीआरआई ने 12 अप्रैल को त्रिपुरा के खोवाई जिले के तेलियामुरा में संयुक्त ऑपरेशन किया।
गिरफ्तार व्यक्ति का नाम क्या है?
गिरफ्तार व्यक्ति का नाम राजू देब है, जो 44 वर्ष का है और पश्चिम त्रिपुरा के जलीलपुर का निवासी है।
इस ऑपरेशन में कितनी मेथामफेटामाइन गोलियाँ जब्त की गईं?
इस ऑपरेशन के दौरान लगभग दो लाख मेथामफेटामाइन गोलियाँ जब्त की गईं।
ये नशीले पदार्थ कहाँ से लाए गए थे?
यह नशीला पदार्थ संभवतः म्यांमार से तस्करी करके लाया गया था।
त्रिपुरा की सीमा किन देशों के साथ लगती है?
त्रिपुरा की सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है और यह तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है।
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